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Showing posts from June, 2020

नशा मुक्त

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Deaddiction Deaddiction   नशा करने से हानियां इन नशीली वस्तुओं के उपयोग से व्यक्ति पागल और सुप्तावस्था में चला जाता है। तम्बाकू के सेवन से तपेदकि, निमोनिया और साँस की बीमारियों का सामना करना पड़ता है। इसके सेवन से जन और धन दोनों की हानि होती है। हिंसा, बलात्कार, चोरी, आत्महत्या आदि अनेक अपराधों के पीछे नशा एक बहुत बड़ी वजह है। देश में नशाखोरी में युवावर्ग सर्वाधिक शामिल हैं।  मनोचिकित्सकों का कहना है कि युवाओं में नशे के बढ़ते चलन के पीछे बदलती जीवन शैली, परिवार का दबाव, परिवार के झगड़े, इन्टरनेट का अत्यधिक उपयोग, एकाकी जीवन, परिवार से दूर रहने, पारिवारिक कलह जैसे अनेक कारण हो सकते हैं। नशे से जन और धन दोनों की हानि होती है नशा एक ऐसी बुराई है जो हमारे समूल जीवन को नष्ट कर देती है। नशे की लत से पीड़ित व्यक्ति परिवार के साथ समाज पर बोझ बन जाता है। युवा पीढ़ी सबसे ज्यादा नशे की लत से पीड़ित है। सरकार इन पीड़ितों को नशे के चुंगल से छुड़ाने के लिए नशा मुक्ति अभियान चलाती है, शराब और गुटखे पर रोक लगाने के प्रयास करती है। नशे के रूप में लोग शराब, गाँ...

Janmashtami. Lord krishna

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Krishna janmashtami श्रीं कृष्ण जन्म भाद्रपद कृष्ण अष्टमी तिथि की घनघोर अंधेरी आधी रात को रोहिणी नक्षत्र में मथुरा के कारागार में वसुदेव की पत्नी देवकी के गर्भ से भगवान श्रीकृष्ण ने जन्म लिया था। जन्म और अवतार में क्या अन्तर है जन्म माँ के गर्भ से लेते हैं जिनका शरीर पाँच तत्व का बना हुआ होता है लेकिन जब ईश्वर शक्ति अवतार लेती हैं तो वह स्वयं सशरीर धरती पर आते हैं और अपना ज्ञान बताते हैं वह माँ के पेट से जन्म नहीं लेते हैं क्या भगवान की जन्म, म्रत्यु होतीं हैं हमारे सभी धर्मों के पवित्र सद्ध ग्रंथों में प्रमाणित हैं कि भगवान जिसे हम (ईश्वर, अल्लाह, खुदा, रब, ईस) आदि नामो से जानते हैं उसकी की कभी जन्म, म्रत्यु नहीं होतीं हैं पुर्ण परमात्मा धरती पर प्रकट होते हैं उनका शरीर पाँच तत्व का बना हुआ नहीं होता, एक तत्व का बना हुआ होता है रोम जेसा शरीर होता है यही प्रमाण हमारे सद्ध ग्रंथों में हैं मीरा किसकी भक्ति करती थी सच्चाई जानें मीरा पहले श्री कृष्ण जी की भक्ति करती थी लेकिन जब मीरा को ज्ञान हुआ कि श्री कृष्ण जी पुर्ण परमात्मा नहीं है और ये मोक्ष की प्राप्ति नहीं ...

Bible knowledge

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Bible ”पवित्रा बाईबल तथा पवित्रा कुरान शरीफ में सृष्टी रचना का प्रमाण“ इसी का प्रमाण पवित्रा बाईबल में तथा पवित्रा कुरान शरीफ में भी है। कुरान शरीफ में पवित्रा बाईबल का भी ज्ञान है, इसलिए इन दोनों पवित्रा सद्ग्रन्थों ने मिल-जुल कर प्रमाणित किया है कि कौन तथा कैसा है सृष्टी रचनहार तथा उसका वास्तविक नाम क्या है। पवित्रा बाईबल (उत्पत्ति ग्रन्थ पृष्ठ नं. 2 पर, अ. 1ः20 - 2ः5 पर) छटवां दिन :- प्राणी और मनुष्य : अन्य प्राणियों की रचना करके 26. फिर परमेश्वर ने कहा, हम मनुष्य को अपने स्वरूप के अनुसार अपनी समानता में बनाएं, जो सर्व प्राणियों को काबू रखेगा। 27. तब परमेश्वर ने मनुष्य को अपने स्वरूप के अनुसार उत्पन्न किया, अपने ही स्वरूप के अनुसार परमेश्वर ने उसको उत्पन्न किया, नर और नारी करके मनुष्यों की सृष्टी की। 29. प्रभु ने मनुष्यों के खाने के लिए जितने बीज वाले छोटे पेड़ तथा जितने पेड़ों में बीज वाले फल होते हैं वे भोजन के लिए प्रदान किए हैं, (माँस खाना नहीं कहा है।) सातवां दिन :- विश्राम का दिन : परमेश्वर ने छः दिन में सर्व सृष्टी की उत्पत्ति की तथा सात...

"जीने की राह" पुस्तक ज्ञान!

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क्या हैं जीने की राह पुस्तक मे ऐसा जो लोगों के जीवन बदल देती हैं  एक व्यक्ति की जीवन यात्रा जन्म से शुरू होती है। उसका / उसकी मंजिल पूर्व निर्धारित है। यहाँ इस पवित्र पुस्तक में, किसी व्यक्ति के जीवन की यात्रा के मार्ग का विस्तृत वर्णन है। मनुष्य का लक्ष्य (स्त्री / पुरुष) मोक्ष की प्राप्ति है।  इस पुस्तक को पढ़ने के बाद बर्बाद हुए परिवार समृद्ध हो जाएंगे। जिस परिवार के पास यह किताब होगी वह इसे पढ़ेगा। जिसके परिणामस्वरूप, वे डी-आदी हो जाएंगे क्योंकि इस पुस्तक में ऐसे सबूत हैं जो किसी की आत्मा को छूते हैं। शराब, तम्बाकू और अन्य नशीले पदार्थों का इतना अधिक फैलाव होगा कि उनके नाम का उल्लेख करने पर भी किसी की आत्मा कांप उठेगी। पूरा परिवार खुशहाल जीवन व्यतीत करेगा। जीवन की यात्रा आसानी से गुजर जाएगी क्योंकि जीवन का मार्ग स्पष्ट हो जाएगा। इस पुस्तक में, आपको इस बारे में पूरी जानकारी मिल जाएगी कि - पूर्ण ईश्वर कौन है? उसका नाम क्या है? उसकी पूजा का तरीका क्या है? मानव जीवन सफल हो जाएगा। परिवार में कोई वाइस नहीं होगा। उस पर भगवान की कृपा हमेशा बरसती रहेगी। जीवन जीने का सर्...

नाम कौन-से राम का जपना हैं

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नाम कौन से राम का जपना है ? गीता जी के अध्याय नं. 15 का श्लोक नं. 16 द्वौ, इमौ, पुरुषौ, लोके, क्षरः, च, अक्षरः, एव, च, क्षरः, सर्वाणि, भूतानि, कूटस्थः, अक्षरः, उच्यते।। अनुवाद: इस संसारमें दो प्रकारके भगवान हैं नाशवान और अविनाशी और ये सम्पूर्ण भूतप्राणियोंके शरीर तो नाशवान और जीवात्मा अविनाशी कहा जाता है। गीता जी के अध्याय नं. 15 का श्लोक नं. 17  उतमः, पुरुषः, तु, अन्यः, परमात्मा, इति, उदाहृतः, यः, लोकत्रायम् आविश्य, बिभर्ति, अव्ययः, ईश्वरः।। अनुवाद: उत्तम भगवान तो अन्य ही है जो तीनों लोकोंमें प्रवेश करके सबका धारण-पोषण करता है एवं अविनाशी परमेश्वर परमात्मा इस प्रकार कहा गया है। उपरोक्त विवरण से स्पष्ट हुआ कि पवित्रा चारों वेद भी साक्षी हैं कि पूर्ण परमात्मा ही पूजा के योग्य है, उसका वास्तविक नाम कविर्देव(कबीर परमेश्वर) है तथा तीन मंत्र के नाम का जाप करने से ही पूर्ण मोक्ष होता है। हमारा वास्तविक रक्षक! संकट मोचन कबीर साहेब हैं कर्म कष्ट (संकट) होने पर कोई अन्य ईष्ट देवता की या माता मसानी आदि की पूजा कभी नहीं करनी है। न किसी प्रकार की बुझा पड़वानी है। क...

कबीर साहेब का प्रकट होना

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कबीर साहेब जी कलयुग में भारत के काशी शहर के लहरतारा तालाब में ज्येष्ठ मास शुक्ल पूर्णमासी विक्रम संवत 1455 (सन् 1398) सुबह ब्रह्म मुहूर्त में कमल के फूल पर शिशु रूप में प्रकट हुए थे। अगर हम एक कमल के फूल पर छोटे-से पत्थर का टुकड़ा रखे तो नहीं टिक सकता। पर कबीर साहेब जी कमल के फूल पर छोटे से बालक रूप में प्रकट हुए। और इस वर्ष 5 जून 2020. को कबीर साहेब प्रकट दिवस मनाया जायेगा. कबीर साहेब चारों युगों में आते हैं  सतगुरु पुरुष कबीर हैं, चारों युग प्रवान। झूठे गुरुवा मर गए, हो गए भूत मसान।। तत्वज्ञान के अभाव से श्रद्धालु शंका व्यक्त करते हैं कि जुलाहे रूप में कबीर जी तो वि. सं. 1455 (सन् 1398) में काशी में आए हैं। वेदों में कविर्देव यही काशी वाला जुलाहा (धाणक) कैसे पूर्ण परमात्मा हो सकता है? इस विषय में दास (सन्त रामपाल दास) की प्रार्थना है कि यही पूर्ण परमात्मा कविर्देव (कबीर परमेश्वर) वेदों के ज्ञान से भी पूर्व सतलोक में विद्यमान थे तथा अपना वास्तविक ज्ञान (तत्वज्ञान) देने के लिए चारों युगों में भी स्वयं प्रकट हुए हैं। सतयुग में सतसुकृत नाम से, त्रेतायुग में मुनिन्द्र ना...

कौन तथा कैसा है कुल का मालिक?

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कौन तथा कैसा है कुल का मालिक? जिन-जिन पुण्यात्माओं ने परमात्मा को प्राप्त किया उन्होंने बताया कि कुल का मालिक एक है। वह मानव सदृश तेजोमय शरीर युक्त है। जिसके एक रोम कूप का प्रकाश करोड़ सूर्य तथा करोड़ चन्द्रमाओं की रोशनी से भी अधिक है। उसी ने नाना रूप बनाए हैं। परमेश्वर का वास्तविक नाम अपनी-अपनी भाषाओं में कविर्देव (वेदों में संस्कृत भाषा में) तथा हक्का कबीर (श्री गुरु ग्रन्थ साहेब में पृष्ठ नं. 721 पर क्षेत्राय भाषा में) तथा सत् कबीर (श्री धर्मदास जी की वाणी में क्षेत्राय भाषा में) तथा बन्दी छोड़ कबीर (सन्त गरीबदास जी के सद्ग्रन्थ में क्षेत्राय भाषा में) कबीरा, कबीरन् व खबीरा या खबीरन् (श्री कुरान शरीफ़ सूरत फुर्कानि नं. 25, आयत नं. 19, 21, 52, 58, 59 में क्षेत्राय अरबी भाषा में)। इसी पूर्ण परमात्मा के उपमात्मक नाम अनामी पुरुष, अगम पुरुष, अलख पुरुष, सतपुरुष, अकाल मूर्ति, शब्द स्वरूपी राम, पूर्ण ब्रह्म, परम अक्षर ब्रह्म आदि हैं, जैसे देश के प्रधानमंत्रा का वास्तविक शरीर का नाम कुछ और होता है तथा उपमात्मक नाम प्रधान मंत्रा जी, प्राइम मिनिस्टर जी अलग होता है। जैसे भारत द...