Janmashtami. Lord krishna
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Krishna janmashtami
मीरा पहले श्री कृष्ण जी की भक्ति करती थी लेकिन जब मीरा को ज्ञान हुआ कि श्री कृष्ण जी पुर्ण परमात्मा नहीं है और ये मोक्ष की प्राप्ति नहीं करा सकते हैं तो मीरा ने कबीर साहेब जी की शरण ग्रहण की ओर अपने मानव जीवन का कल्याण किया
श्रीं कृष्ण जन्म
भाद्रपद कृष्ण अष्टमी तिथि की घनघोर अंधेरी आधी रात को रोहिणी नक्षत्र में मथुरा के कारागार में वसुदेव की पत्नी देवकी के गर्भ से भगवान श्रीकृष्ण ने जन्म लिया था।जन्म और अवतार में क्या अन्तर है
जन्म माँ के गर्भ से लेते हैं जिनका शरीर पाँच तत्व का बना हुआ होता है लेकिन जब ईश्वर शक्ति अवतार लेती हैं तो वह स्वयं सशरीर धरती पर आते हैं और अपना ज्ञान बताते हैं वह माँ के पेट से जन्म नहीं लेते हैंक्या भगवान की जन्म, म्रत्यु होतीं हैं
हमारे सभी धर्मों के पवित्र सद्ध ग्रंथों में प्रमाणित हैं कि भगवान जिसे हम (ईश्वर, अल्लाह, खुदा, रब, ईस) आदि नामो से जानते हैं उसकी की कभी जन्म, म्रत्यु नहीं होतीं हैं पुर्ण परमात्मा धरती पर प्रकट होते हैं उनका शरीर पाँच तत्व का बना हुआ नहीं होता, एक तत्व का बना हुआ होता है रोम जेसा शरीर होता है यही प्रमाण हमारे सद्ध ग्रंथों में हैंमीरा किसकी भक्ति करती थी सच्चाई जानें
मीरा पहले श्री कृष्ण जी की भक्ति करती थी लेकिन जब मीरा को ज्ञान हुआ कि श्री कृष्ण जी पुर्ण परमात्मा नहीं है और ये मोक्ष की प्राप्ति नहीं करा सकते हैं तो मीरा ने कबीर साहेब जी की शरण ग्रहण की ओर अपने मानव जीवन का कल्याण किया
श्री कृष्ण जी पुर्ण परमात्मा नहीं है इनकी भी जन्म, म्रत्यु होतीं हैं देवी पुराण तीसरा स्कन्द में स्वयं बोल रहे हैं कि हमारी जन्म, म्रत्यु होतीं हैं हम नित्य नहीं है हमारा तो आविर्भाव जन्म तथा तिरोभाव अर्थात मृत्यु होती है
श्रीं कृष्ण जी कुल करतार नहीं है कबीर साहेब जी ही पुर्ण परमात्मा हैं
हमारे वेदों में लिखा है कि पूर्ण परमात्मा अपने साधक की आयु भी बड़ा देता है लेकिन श्री कृष्ण जी अपने सगे भांजे अभिमन्यु को भी नहीं बचा पाये कबीर जी ने कमाल और कमाली को जिवित किया था
पुर्ण परमात्मा कोन हैं
हमारे सभी धर्मों के ग्रंथों में प्रमाणित है पुर्ण परमात्मा कबीर साहेब जी हैं जिन्होंने 6 दिन में सरष्टि रच दि तथा 7 वे दिन अपने निज स्थान अमर लोक में जा विराजे, वह कुल करतार कबीर साहेब जी ही हमारे पाप नाश कर सकते हैं कबीर साहेब जी धरती पर चारों युगों में आते हैं सत युग में सत सुकृत नाम से, त्रेता में मुनेंद्र नाम द्वापर में करुणामय नाम और कलयुग में अपने वास्तविक नाम कबीर नाम से प्रकट होते हैं कबीर साहेब मां के गर्भ से जन्म नहीं लेते अन्य देव मां के गर्भ से जन्म लेते हैं श्रीं कृष्ण जी ने भी माँ के गर्भ से जन्म लिया था कबीर साहेब जी ही हमारे पाप नाश कर सकते हैं
पुर्ण परमात्मा की भक्ति केवल अधिकारी संत ही बता सकता है अन्य संत, महंत नहीं
गीता जी के अध्याय 4 श्लोक 32 और 34 में सिद्ध किया है कि तत्वदर्शी संत ही पुर्ण मोक्ष दिला सकते हैं उसकी पहचान गीता अध्याय 15 श्लोक 1-4 में हैं
वर्तमान में विश्व में कोन हैं तत्वदर्शी संत?
वर्तमान में विश्व में बहुत सारे संत हैं लेकिन किसी के पास आध्यात्मिकता नहीं है वर्तमान में विश्व विजेता संत केवल संत रामपालजी ही पुर्ण संत है उनकी शरण में जाने से ही पूर्ण लाभ मिल सकता है अन्य से नहीं
अधिक जानकारी के लिए आप पवित्र पुस्तकों को पढ़े - (ज्ञान-गंगा, धरती पर अवतार, गीता तेरा ज्ञान अमृत, जीने की राह, भक्ति से भगवान तक, अंध श्रद्धा भक्ति खतरा ये जान) आप इन पुस्तकों को हमारी वेबसाइट से डाउनलोड कर सकते हैं नीचे हमारी वेबसाइट हैं







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