रोग क्या है
रोग क्या है
रोग दो होते हैं आत्मा का और शरीर का, शरीर का रोग अनेक बीमारियों से ग्रस्त हो सकता है और जड़ी बूटियों, दवाईयों से ठीक हो जाते हैं लेकिन आत्मा का सबसे बड़ा रोग जन्म-मरण का है जो सत्य भक्ति करने से ही टिक होता है| सत्य भक्ति से शरीर और आत्मा दोनों ही ठीक रहती हैं
शारीरिक रोग
शरीर या चित्त की वह स्थिति जिसके कारण संतप्त व्यक्ति को दर्द, दुष्क्रिया, तनाव की अनुभूति होती है, या जिनके संपर्क में आने पर व्यक्ति बीमारी का शिकार हो सकता है। कभी कभी व्यापक रूप से इस शब्द का प्रयोग चोट, विकलांगता, सिंड्रोम, संक्रमण, लक्षण, विचलक व्यवहार और संरचना एवं कार्य की विशिष्ट विविधताओं के लिए भी किया जाता है, जबकि अन्य संदर्भों में इन्हें विशेषणीय श्रेणियों में रखा जा सकता है। एक रोगजन या संक्रामक एजेंट एक जैविक एजेंट है, जिसके कारण इसके परपोषी को रोग या बीमारी होने की संभावना होती है। यात्री वायरस एक ऐसा वायरस होता है, जो किसी व्यक्ति के अंदर आसानी से फ़ैल जाती है या बीमारी या रोग को कोई लक्षण दिखाए बिना शरीर को संक्रमित कर देती है। भोजन से होने वाली बीमारी या भोजन विषाक्तता एक प्रकार की बीमारी है जो रोगजनक जीवाणु, जीव-विष, विषाणु, प्राइऑन या परजीवी से संदूषित भोजन के उपभोग के कारण होता है।
बचने के उपाय
शारीरिक और मानसिक रोगों से बचाव के लिए विभिन्न प्रकार की दवाओं और अन्य उपयोगी जानकारी का इस्तेमाल करने से भी ठीक हो सकते हैं
सत्य भक्ति करने से अनेक समस्या का समाधान
शास्त्रों के अनुसार सत्य भक्ति करने से अनेक प्रकार की बीमारियां ठीक हो जाती हैं सत्य भक्ति करने से मानसिक प्रॉब्लम दूर हो जाती है चिड़चिड़ापन दूर हो जाता है शरीर स्वस्थ रहता है और दिमागी संतुलन ठीक रहता है अतः हमें शरीर का संतुलन रखने और अपने जीवन का कल्याण कराने के लिए सत्य भक्ति करना जरूरी है
वर्तमान में विश्व में केवल संत रामपालजी ही सत्य भक्ति बता रहे हैं
वर्तमान में विश्व में केवल संत रामपाल जी महाराज जी सत्य भक्ति बता रहे हैं जिससे अनेक प्रकार की असाध्य रोग वह बीमारियां ठीक हो रही है और लोगों का जीवन सफल हो रहा है अतः उनसे जुड़ कर अपना जीवन का कल्याण कराना चाहिए आप उनके द्वारा लिखित धार्मिक पुस्तकें भी पढ़ सकते हैं
- ज्ञान गंगा
- जीने की राह
- अंध श्रद्धा भक्ति खतरा ये जान
- भक्ति से भगवान तक
- गीता तेरा ज्ञान अर्मत

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