हमारे हिंदू धर्म के देवता लोग भी अमर नहीं है
Hindu gods
क्या आप जानते हैं हमारे हिंदू धर्म के देवता लोग भी अमर नहीं है?
हमारे हिंदू धर्म के देवता लोग भी अमर नहीं है उनकी भी जन्म म्रत्यु होतीं हैं यहाँ तक कि ब्रम्हा, विष्णु और महेश भी अजर अमर नहीं है उनकी भी जन्म म्रत्यु होतीं हैं|दोस्तों ये सवाल सबके मन में चल रहा होगा कि आज तक किसी ने कुछ बताया नहीं कि देवता लोग भी मरते हैं |
हम बहुत सी पौराणिक कथाओं को भी पढ़ते हैं और सुनते हैं लेकिन आज तक समझ में नहीं आया कि हमारे पूजनीय देवताओं की जन्म म्रत्यु होतीं हैं,
हम बचपन से लेकर आज तक देवताओं की पूजा करते आ रहे हैं तथा हमारे पूर्वजों ने भी इनकी पूजा की और एक दिन चलें गए, लेकिन आज तक कोई समझ नहीं पाया और ना किसी ने बताया कि इनकी भी जन्म म्रत्यु होतीं हैं, यहाँ तक कि हम धार्मिक गुरु और पंडितों ने भी नहीं बताया हमारे पवित्र शास्त्रों में इनकी संपूर्ण जानकारी दी गई है लेकिन आज दिन तक कोई समझ नहीं पाया, इसका मुख्य कारण है कि हमें सच्चा गुरु नहीं मिला जो हमें इन सद्ग्रन्थों से रूबरू करा सकें | हमें सद ग्रन्थों को समझने के लिए एक आध्यात्मिक गुरु की जरूरत होतीं हैं जो अधिकारी हों और सभी सद्ग्रन्थों को ठीक से जानता हो साथ में नाम देने का पुर्ण अधिकार हों |
आज तक विश्व में किसी भी धर्मगुरु ने आध्यात्मिक ज्ञान की जानकारी नहीं दी केवल संत रामपालजी ही एक ऎसे संत हैं जो पुरे विश्व में सत्य भक्ति बताते हैं और नाम देने का अधिकार है और हमारे पवित्र सद्ग्रन्थों से रूबरू करा रहे हैं तो जानिए हमारे सदग्रंथ क्या प्रमाणित करते हैं पढ़े पुरी जानकारी...............
तीनों गुण क्या हैं? प्रमाण सहित‘‘
‘‘तीनों गुण रजगुण ब्रह्मा जी, सतगुण विष्णु जी, तमगुण शिव जी हैं। ब्रह्म
(काल) तथा प्रकृति (दुर्गा) से उत्पन्न हुए हैं तथा तीनों नाशवान हैं‘‘
प्रमाण :- गीताप्रैस गोरखपुर से प्रकाशित श्री शिव महापुराण जिसके सम्पादक हैं
श्री हनुमान प्रसाद पोद्दार पृष्ठ सं. 24 से 26 विद्यवेश्वर संहिता तथा पृष्ठ 110 अध्याय
9 रूद्र संहिता ‘‘इस प्रकार ब्रह्मा-विष्णु तथा शिव तीनों देवताओं में गुण हैं, परन्तु शिव(ब्रह्म-काल) गुणातीत कहा गया है।
दूसरा प्रमाण :- गीताप्रैस गोरखपुर से प्रकाशित श्रीमद् देवीभागवत पुराण जिसके
सम्पादक हैं श्री हनुमान प्रसाद पोद्दार चिमन लाल गोस्वामी, तीसरा स्कंद, अध्याय 5
पृष्ठ 123 :- भगवान विष्णु ने दुर्गा की स्तुति की : कहा कि मैं (विष्णु), ब्रह्मा तथा
शंकर तुम्हारी कृपा से विद्यमान हैं। हमारा तो आविर्भाव (जन्म) तथा तिरोभाव (मृत्यु)
होती है। हम नित्य (अविनाशी) नहीं हैं। तुम ही नित्य हो, जगत् जननी हो, प्रकृति
और सनातनी देवी हो। भगवान शंकर ने कहा : यदि भगवान ब्रह्मा तथा भगवान विष्णु
तुम्हीं से उत्पन्न हुए हैं तो उनके बाद उत्पन्न होने वाला मैं तमोगुणी लीला करने वाला
शंकर क्या तुम्हारी संतान नहीं हुआ ? अर्थात् मुझे भी उत्पन्न करने वाली तुम ही हों।
इस संसार की सृष्टि-स्थिति-संहार में तुम्हारे गुण सदा सर्वदा हैं। इन्हीं तीनों गुणों से
उत्पन्न हम, ब्रह्मा-विष्णु तथा शंकर नियमानुसार कार्य में तत्त्पर रहते हैं।
उपरोक्त यह विवरण केवल हिन्दी में अनुवादित श्री देवीमहापुराण से है, जिसमें
कुछ तथ्यों को छुपाया गया है। इसलिए यही प्रमाण देखें श्री मद्देवीभागवत महापुराण
सभाषटिकम् समहात्यम्, खेमराज श्री कृष्ण दास प्रकाशन मुम्बई, इसमें संस्कृत
सहित हिन्दी अनुवाद किया है। तीसरा स्कंद अध्याय 4 पृष्ठ 10, श्लोक 42ः-
ब्रह्मा - अहम् ईश्वरः फिल ते प्रभावात्सर्वे वयं जनि युता न यदा तू नित्याः
के अन्ये सुराः शतमख प्रमुखाः च नित्या नित्या त्वमेव जननी प्रकृतिः पुराणा। (42)
हिन्दी अनुवाद :- हे मात! ब्रह्मा, मैं तथा शिव तुम्हारे ही प्रभाव से जन्मवान हैं,
नित्य नही हैं अर्थात् हम अविनाशी नहीं हैं, फिर अन्य इन्द्रादि दूसरे देवता किस
प्रकार नित्य हो सकते हैं। तुम ही अविनाशी हो, प्रकृति तथा सनातनी देवी हो।
पृष्ठ 11-12, अध्याय 5, श्लोक 8 :- यदि दयार्द्रमना न सदांऽबिके कथमहं विहितः
च तमोगुणः कमलजश्च रजोगुणसंभवः सुविहितः किमु सत्वगुणों हरिः।(8)
अनुवाद :- भगवान शंकर बोले :-हे मात! यदि हमारे ऊपर आप दयायुक्त हो तो
मुझे तमोगुण क्यों बनाया, कमल से उत्पन्न ब्रह्मा को रजोगुण किस लिए बनाया तथा
विष्णु को सतगुण क्यों बनाया? अर्थात् जीवों के जन्म-मृत्यु रूपी दुष्कर्म में क्यों लगाया?
श्लोक 12 :- रमयसे स्वपतिं पुरुषं सदा तव गतिं न हि विह विद्म शिवे (12)
हिन्दी - अपने पति पुरुष अर्थात् काल भगवान के साथ सदा भोग-विलास करती
रहती हो। आपकी गति कोई नहीं जानता।
निष्कर्ष :- उपरोक्त प्रमाणों से प्रमाणित हुआ की रजगुण - ब्रह्मा, सतगुण विष्णु
तथा तमगुण शिव है ये तीनों नाशवान है। दुर्गा का पति ब्रह्म (काल) है यह उसके
साथ भोग विलास करता है।
दोस्तों आप को पता चल गया होगा कि ब्रम्हा, विष्णु और महेश की भी जन्म म्रत्यु होतीं हैं, अब आप यही सोच रहे होंगे कि आज तक ऐसी जानकारी पहले कभी नहीं मिली और फिर आप सोच रहे होंगे कि जब देवता लोग अमर नहीं है तो फिर पुर्ण परमात्मा कोन हैं? चिंता ना करें हम अगली पोस्ट में आपको पुर्ण परमात्मा की सम्पूर्ण जानकारी देंगे कि पुर्ण परमात्मा कोन हैं, कैसा हैं, कहां रहता है तथा केसे मिलता है तो दोस्तों जुड़े रहे हमारी वेबसाइट पर और आध्यात्मिक ज्ञान की जानकारी देते रहेंगे |
आशा करता हुँ, कि ये पोस्ट आपको पसंद आई होगीं धन्यवाद ||
Thank you
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