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Showing posts from September, 2020

जीने की राह

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  विशेष जानकारी                          Sprichual knowledge books क्या आप जानते हैं? कि जगतगुरु तत्वदर्शी संत रामपालजी महाराज द्वारा लिखित पुस्तक जीने की राह और ज्ञान गंगा को पढ़ कर लाखों की संख्या में लोगों ने अपने जीवन में बदलाव पाया हैं ऐसा क्या है इस पुस्तक में जिसे पढ़ने के बाद लोग नशे जेसी बुराईयों को छोड़ देता है ओर संत रामपालजी महाराज के सानिध्य में उनके विचारों को ध्यान में रखते हुए उनके अनुयायी ना तो किसी प्रकार का नशा करते हैं और ना ही किसी को नशे की चीजों में साथ देते हैं तथा विवाह में दहेज बिल्कुल नहीं लेते हैं वर्तमान में विश्व में केवल संत रामपालजी ही इतना समाज सुधाकर काम कर रहे हैं जिनके अनुयायी संविधान का भी पूर्ण रूप से पालन कर रहे हैं जेसा की हमारे संविधान में म्रत्यु भौज बिलकुल बंद हैं लेकिन फिर भी लोग अंध विश्वास और पाखण्ड वाद मे ये सब करते हैं लेकिन संत रामपालजी महाराज के अनुयायी बिल्कुल म्रत्यु भौज नहीं करते ना किसी तरह का पाखंड वाद करते हैं बुक "जीनी की राह (जीने का तरीका)" हर घर में रखे जाने ...

8 सितंबर को ग्रेट सायरन का धरती पर अवतार

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8 September Avatar Diwas (अवतरण दिवस):  जानिए 8 सितम्बर को क्या है?, 8 सितम्बर है जन्म दिवस एक महान शायरन तत्वदर्शी संत का या कहें समूची मानव जाति के तारणहार आदिपुरुष परमेश्वर के अंश का। आइये जानें कौन है वह तारणहार जो करेगा युग परिवर्तन। 8 September अवतार दिवस (Avatar Diwas) मुख्य बिंदु पूरे विश्व के एकमात्र तत्वदर्शी सन्त रामपाल जी महाराज हैं जिनका जन्म दिवस है 8 सितम्बर नास्त्रेदमस, जीन डिक्सन, कीरो, अनंदाचार्य, प्रोफेसर हरार जैसे कई भविष्यवक्ताओं ने की सन्त रामपाल जी महाराज के विषय में भविष्यवाणियां सभी धर्मों के धर्मग्रंथों को खोलकर गूढ़ रहस्यों को सामने लाये सन्त रामपाल जी महाराज, तत्वज्ञान से खोली नकली धर्मगुरुओं की पोल 21वीं सदी में आध्यात्मिक क्रांति के साथ तत्वज्ञान से सामाजिक सुधारों, दहेज मुक्त भारत, नशा मुक्त भारत बनाने की दिशा में अग्रसर सन्त रामपाल जी महाराज भारत की पुण्यभूमि पर सदैव से होता रहा है अवतारों का अवतरण 8 September Avatar Diwas: मानवता के पूर्ण विकास का कार्य आदि काल से भारत की पुण्यभूमि में होता रहा है। इसी पुण्यभूमि पर अवतारों का अवतरण आदि काल से होता आ ...

श्राद्ध करना एक अंध विश्वास और पाखण्ड वाद है जाने

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  श्राद्ध करना एक अंध विश्वास और पाखण्ड वाद है जा रहा है ...........  दोस्तों वर्तमान में सबलेट हैं सब पढ़े लिखे लोग हैं फिर भी हम हमारे रीति रिवाजों के चक्कर में फंसे हुए हैं हमें सच्चाई से बहुत दूर रखा गया है पुराने समय में लोग गरीब और अनपढ़ होते थे जिन्हें वह ना तो शास्त्रों को पढ़ाते थे- ना उन्हें। कितना अधिकार था हमारे धर्म गुरु हमें अंध विश्वास मे डूबे रखते थे जबकि हमारे शास्त्रों में श्राद्ध करना बिल्कुल मना कर रखा है और जो शास्त्र विरूद्व साधना करते हैं उसे ना मोक्ष मिलता है ना परम गति | दोस्तों सबसे काश बात में आपको बता दूँ कि जो इंसान जिवित होते हुए कुछ ना कर सके तो मरने के बाद क्या करेगा और जब वह जिवित था तब उसने सत्य भक्ति, साधना नहीं करी तो मरने के बाद हमारे द्वारा एक श्राद्ध करने के साथ उसका मोक्ष। हो सकता है इसलिए दोस्तों अगर कुछ करना ही है तो जिवित सत्य भक्ति करते हैं ताकि हमे श्राद्ध करने की ही बात ही नहीं हैं | और हमारे पूर्वजों के लिए श्राद्ध करने से अच्छे हैं उनके जिवित होते हुए उनकी सेवा करें ताकि उनकी आत्मा संतुष्ट हो जाए और उनका मन सत्य भक्ति करने में लग...