8 सितंबर को महान पुरुष का अवतार दिवस
8 सितंबर को महान पुरुष का अवतार दिवस
8 सितंबर को उस महान संत का अवतार दिवस हैं जिन्होंने समाज सुधारक के साथ देश व विदेश में लोगों को तत्वज्ञान की जागृति लाने के लिए अपना सर्वस्व जीवन लगा रखा हैं
आमजन तक तत्वज्ञान पहुँचाने के लिए अनेकों मुसीबतों का सामना करना पड़ा, कही जगह लोगों ने पत्थर फेके, आश्रम तोड़ दिये डटकर विरोध किया कहीं बार तो जेल जाना पड़ा |
अनेको मुसीबतों का सामना करके भी संत रामपालजी ने अपना प्रयास जारी रखा और तत्वज्ञान आमजन तक पहुंचाया |
वर्तमान में संत रामपालजी द्वारा समाज सुधारक के लिए कार्य व विशेष योगदान -
समाज सुधार: सतगुरु रामपाल जी कुरीतियों को समाप्त करने में सफल रहे हैं
सतगुरु रामपाल जी महाराज बताते हैं कि मनमानी परंपराऐं, मान-बड़ाई, लोक दिखावा भक्ति मार्ग में बाधक हैं। सामाजिक अव्यवस्थाएं जैसे – वधुओं को दहेज की बलि-वेदी पर चढ़ा देने वाली दहेज-प्रथा, विवाह में बैंड-बाजे-डीजे बजाना, बेशर्मी से नाचना, नारी के प्रति असमानता और उपेक्षा पूर्ण भाव, जादू, टोना, मन्त्र-तंत्र, मनोकामना पूर्ति के लिए बलि जैसे अंधविश्वास, शारीरिक और मानसिक विकास को विक्षिप्त करने वाली बाल-विवाह प्रथा, चार वर्णों के भेदभाव की अन्यायवादी वर्णव्यवस्था, मृत्यु भोज, जन्मोंत्सव, पटाखे आदि फिजूलखर्ची त्याज्य हैं। नशा चाहे तंबाकू, बीड़ी, सिगरेट, खैनी, गुटखा, गुड़ाखू का हो या गांजा, चरस, अफीम और उनसे निर्मित उत्पाद, मदिरा शराब या फिर नशीली दवाइयों का ये सभी समाज की बर्बादी का कारण बन रहे हैं। इनके साथ समाज को बांटने वाले जातिवाद, सम्प्रदायवाद, क्षेत्रवाद, भाषावाद, प्रांतवाद आदि कुरीतियों को जड़ से समाप्त करना आवश्यक है। संत रामपाल जी की प्रेरणा से उनके भक्त सभी कुरीतियों से पूरी तरह से रहित हैं और इन्हें समूल समाप्त करने के लिए तत्पर हैं।
जाति, धर्म, लिंग के आधार पर होने वाले भेदभाव का केवल सन्त रामपाल जी ही सफल रूप से उन्मूलन कर सके हैं। सन्त रामपाल जी से दीक्षित उनके किसी भी अनुयायी में इस प्रकार का कोई भेदभाव नहीं पाया जाता है। यह देखकर भारत के इतिहास के भक्तियुग का स्मरण हो आता है जब कबीर साहेब ने सभी के लिए अर्थात धर्म, जाति और लिंग से परे भक्ति के द्वार खुलवाए थे। ऐसे अनमोल समाज का गठन केवल सन्त रामपाल जी महाराज ही कर सके हैं।
'दहेज मुक्त विवाह’ की पहल कर संत रामपाल जी महाराज ने समाज सुधार किया
संत रामपाल जी महाराज जी द्वारा चलाये जा रहे दहेज मुक्त विवाह अभियान से प्रेरित होकर संत रामपाल जी महाराज के अनुयायियों के द्वारा बिना किसी दान-दहेज के अद्भुत, अद्वितीय विवाह सम्पन्न किये जाते हैं जिनसे दहेज नामक राक्षस से छुटकारा तो मिला ही है, साथ ही में फिजूलखर्ची व दिखावे पर विराम चिन्ह लगा है, क्योंकि संत रामपाल जी महाराज बताते हैं कि जब विवाह महज संयोग है तो फिर व्यर्थ की फिजूलखर्ची क्यों, इस धन का दुरूपयोग न करते हुए इसे सही जगह पर दान-धर्म पर लगाया जाए जिससे वह धन अवश्य फलीभूत होगा और उसका कई गुना लाभ मिलेगा। इस तर्ज पर सन्त रामपाल जी महाराज ने अद्भुत रमैनी के माध्यम से विवाह आरम्भ करवाये। जिसमें विश्व के सभी देवी देवताओं के आव्हान के साथ पूर्ण परमेश्वर की प्रार्थना से रमैनी मात्र 17 मिनट में सम्पन्न हो जाती हैं। रमैनी के माध्यम से लाखों जोड़े विवाह बंधन में बंध चुके हैं एवं सुखी जीवन जी रहे हैं।
संत रामपाल जी महाराज जी की प्रेरणा से कई रक्तदान शिविर हुए सम्पन्न -
संत रामपाल जी द्वारा समाज सुधार: संत रामपाल जी महाराज जी के अनुयायियों के द्वारा अपने गुरु जी द्वारा बताए अद्वितीय ज्ञान से प्रेरित होकर संत रामपाल जी महाराज जी के सत्संगों के माध्यम से कई रक्तदान शिविर आयोजित हुए हैं, क्योंकि संत रामपाल जी महाराज बताते हैं कि साधक अर्थात भक्त या संत जन को हमेशा परमार्थी होना चाहिए। सेवा और परदुखकातरता मानवता का लक्षण है। सदैव दूसरों की मदद के लिए तत्पर रहना साधक के लिए श्रेयस्कर है।
वृक्ष कबहुं न फल भखै, नदी न संचै नीर।
परमारथ के कारने साधुन धरा शरीर।।
संत रामपाल जी द्वारा समाज सुधार : संत रामपाल जी महाराज जी के सान्निध्य में देहदान जैसा अनमोल दान
संत रामपाल जी महाराज जी ने अपने अनुयायियों को सत्संगों के माध्यम से बताया है कि दान सिर्फ पैसे का ही नहीं होता अपितु अन्य कई और भी महत्वपूर्ण दान हैं जो अति लोक कल्याणकारी हैं उन्हीं में से एक है देहदान। अपने गुरु जी द्वारा बताये गए इस अनमोल ज्ञान से प्रेरित होकर संत रामपाल जी महाराज जी के अनुयायियों ने देहदान का संकल्प लिया। इन्हीं में से कई अनुयायियों के निधन के बाद उनके परिवार जनों ने इस संकल्प को पूरा भी किया है।
समाज सुधार: कोरोना महामारी के दौरान सरकार का भरपूर सहयोग किया
जब देश वैश्विक महामारी कोरोना के कारण उत्पन्न विषम परिस्थितियों से जूझ रहा था तब कोई भी धर्मावलम्बी चाहे वह किसी भी धर्म का पीर, फकीर, गुरु, पादरी इत्यादि हो आगे नहीं आया। सभी छिपे घूम रहे थे। सामान्य परिस्थितियों में ज्ञान बाँटने वाले देश की मदद के लिए आगे नहीं आए। किंतु इन कठिन परिस्थितियों में संत रामपाल जी महाराज जी ने खुद आगे आकर सरकार को अपने आश्रम सौंपकर उन्हें कोविड सेंटर बनाने का आग्रह किया और कोविड सेंटर में आने वाले सभी खर्चों को चाहे वह दवाई, खाना-पीना, शौचालय, पंखा, बिस्तर, पलंग इत्यादि का खर्च खुद ही वहन करने का वादा किया। साथ ही यह बात भूलने योग्य नहीं है कि जब अनेकों प्रवासी मजदूर अपने अपने राज्य पैदल जा रहे थे तब सन्त रामपाल जी महाराज ने अनेकों मजदूरों के लिए आश्रम के दरवाजे खोले।
समय-समय पर अन्नदान कर, निभाया सच्चे साधुजन होने का कर्तव्य-
संत रामपाल जी महाराज जी द्वारा समाज सुधार: संत रामपाल जी महाराज जी द्वारा बताए गए ज्ञान से प्रेरणा लेकर संत रामपाल जी महाराज जी के सान्निध्य में संचालित मुनीन्द्र धर्मार्थ ट्रस्ट द्वारा कोरोना जैसे कठिन दौर में जब देश का निम्न वर्ग भुखमरी जैसे तंग हालातों से जूझ रहा था, जब लोगों के पास आय का कोई साधन नहीं था और दो जून की रोटी के लिए भी लोग आस लगाए बैठे थे। तब संत रामपाल जी महाराज जी अनुयायियों ने घर-घर जाकर लोगों को निःशुल्क भोजन सामग्री प्रदान की।
सन्त रामपाल जी ने किया आव्हान पाखंड मुक्त भारत का-
सन्त रामपाल जी महाराज एकमात्र ऐसे सन्त हैं जिन्होंने पाखण्डवाद का सफलतापूर्वक सही तर्कों के साथ खंडन किया है। उन्होंने धर्म के नाम पर अंधाधुंध फैले व्यापार को उजागर किया, शास्त्रों का नाम लेकर मनमानी क्रियाओं का खंडन किया। इतना ही नहीं बल्कि सन्त रामपाल जी ने सभी शास्त्रों को खोला और पढ़कर सुनाया। जनता को तत्वज्ञान से परिचित करवाया। सन्त रामपाल जी महाराज पूरे विश्व में एकमात्र तत्वदर्शी सन्त हैं। व्रत, उपवास, जीवहत्या, मांसाहार, सुरापान, मूर्तिपूजा के विषय में शास्त्र क्या कहते हैं इस विषय में केवल सन्त रामपाल जी महाराज ने शास्त्र खोलकर प्रमाण दिया। गुरु बनाना क्यों आवश्यक है और एक पूर्ण गुरु के क्या लक्षण होते हैं यह प्रमाण सहित बताकर सन्त रामपाल जी ने समाज पर उपकार किया है। इतिहास गवाह है कि आज तक किसी धर्मगुरु ने शास्त्रों के वास्तविक अर्थ से हमारा परिचय नहीं करवाया था। साथ ही यह भी सर्वविदित है कि कुरान और बाइबल खोलकर सही अर्थ बताने वाले सन्त केवल सन्त रामपाल जी महाराज ही हुए हैं। सन्त रामपाल जी महाराज ने गुरु के महत्व, नामदीक्षा और नाम स्मरण के महत्व को बताकर मानव जीवन सफल बनाने का अवसर दिया है।
समाज सुधार : कोरोना महामारी के दौरान सरकार का भरपूर सहयोग किया
जब देश वैश्विक महामारी कोरोना के कारण उत्पन्न विषम परिस्थितियों से जूझ रहा था तब कोई भी धर्मावलम्बी चाहे वह किसी भी धर्म का पीर, फकीर, गुरु, पादरी इत्यादि हो आगे नहीं आया। सभी छिपे घूम रहे थे। सामान्य परिस्थितियों में ज्ञान बाँटने वाले देश की मदद के लिए आगे नहीं आए। किंतु इन कठिन परिस्थितियों में संत रामपाल जी महाराज जी ने खुद आगे आकर सरकार को अपने आश्रम सौंपकर उन्हें कोविड सेंटर बनाने का आग्रह किया और कोविड सेंटर में आने वाले सभी खर्चों को चाहे वह दवाई, खाना-पीना, शौचालय, पंखा, बिस्तर, पलंग इत्यादि का खर्च खुद ही वहन करने का वादा किया। साथ ही यह बात भूलने योग्य नहीं है कि जब अनेकों प्रवासी मजदूर अपने अपने राज्य पैदल जा रहे थे तब सन्त रामपाल जी महाराज ने अनेकों मजदूरों के लिए आश्रम के दरवाजे खोले।
71वें अवतरण दिवस पर जानिए संत रामपाल जी महाराज के संघर्ष के बारे में
संत रामपाल जी महाराज जी का संघर्ष : 8 सितंबर 1951 को भारत की पावन धरती पर अवतरित हुए एक ऐसे संत का अवतरण हुआ जिन्होंने हम जीवों के उद्धार के लिए अपना जीवन न्यौछावर कर दिया। सतज्ञान के प्रचार के लिए उन्होंने अपनी जान हथेली पर रख दी, नौकरी, घर परिवार सब कुछ त्याग दिया। ऐसे महान संत, जो परमार्थ के लिए अपना सर्वस्व वार दें, इस धरा पर यदा कदा ही प्रकट होते हैं। हम बात कर रहे हैं तत्वदर्शी सतगुरु रामपाल जी महाराज जी की जिन्हे परमार्थ के मार्ग पर कदम रखने के बाद अनेकों संघर्षों का सामना करना पड़ा पर उन्होंने कभी पीछे मुड़ कर नहीं देखा।
कैसे हुई संत रामपाल जी को तत्वज्ञान की प्राप्ति?
संत रामपाल जी महाराज जी का जन्म 8 सितम्बर 1951 को हरियाणा के छोटे से गांव धनाना में हुआ। पढ़ाई लिखाई पूरी कर संत रामपाल जी सिंचाई विभाग में जूनियर इंजीनियर के पद पर कार्यरत हुए। राम कृष्ण की भक्ति करने वाले संत रामपाल जी महाराज को पूर्ण परमात्मा का ज्ञान स्वामी रामदेवानंद जी से प्राप्त हुआ। 17 फरवरी 1988 को संत रामपाल जी ने नाम दीक्षा ली और तन मन से भक्ति करने लगे।
सन् 1994 में स्वामी रामदेवानंद जी ने संत रामपाल जी महाराज को नाम दीक्षा देने का आदेश दिया और उनसे कहा की तेरे समान इस विश्व में संत नहीं होगा और वहीँ से हुई संत रामपाल जी महराज की हमारे लिए शुरू की गई भक्ति मार्ग की शुरुआत।
संत रामपाल जी महाराज का संघर्ष: परमार्थ के लिए नौकरी का त्याग
गुरु पद प्राप्त करने के बाद संत रामपाल जी महाराज ने सत्संग व् पाठ करना शुरू किया। लेकिन धीरे धीरे गुरु पद की जिम्मेदारियां इतनी बढ़ गई कि संत रामपाल जी महाराज को अपनी नौकरी से त्याग पत्र देना पड़ा।
परमार्थ के लिए घर का त्याग
जब संत रामपाल जी महाराज ने नौकरी छोड़ी तब वह नौकरी ही उनके परिवार के निर्वाह का एकमात्र साधन थी पर अपने सतगुरु के आदेश का पालन करने के लिए और परमात्मा के बच्चों के उद्धार के लिए उन्होंने नौकरी त्याग दी। उन्होंने अपने परिवार तथा बच्चों को भगवान के भरोसे छोड़ दिया और परमात्मा के लिए अपना जीवन समर्पण कर दिया।
संत रामपाल जी महाराज का संघर्ष : गांव गांव जाकर तत्वज्ञान का प्रचार किया और विरोध सहा
एक बार घर त्याग देने के बाद संत रामपाल जी कभी मुड़कर घर वापस नहीं गए। उन्होंने अपने कुछ भक्तों के सहयोग से गाँव गाँव, नगर नगर जाकर सत्ज्ञान का प्रचार किया। सर्व धर्मों के शास्त्रों का अध्ययन किया और उनमें से परमात्मा का सच्चा ज्ञान निकालकर भक्त समाज के सामने रख दिया। दिन रात सत्संग किये, पुस्तकें लिखी। 20-20 घंटे लगातार काम किया। समाज में व्यापत कुरीतियों तथा नकली संतो द्वारा फैलाये गए गलत ज्ञान पर दृढ़ लोगों ने परम संत और उनके द्वारा दिये गए ज्ञान का बहुत विरोध किया पर सतगुरु जी द्वारा दिया गया परमेश्वर कबीर साहेब का ज्ञान ऐसा था जैसे तोप का गोला हो जिसके आगे कोई टिक नही सका।
और ज्ञान सब ज्ञानड़ी, कबीर ज्ञान सो ज्ञान।
जैसे गोल तोप का करता चले मैदान।।
8 सितंबर 2021 संत रामपाल जी महाराज जी का 71 वां अवतरण दिवस: जब भी कोई महापुरुष समाज में व्याप्त बुराईयों को दूर करने (समाज सुधार) का बीड़ा उठाते हैं तो वह समाज के तथाकथित ठेकेदारों की आँखों में चुभने लगते हैं। ऐसे ही एक संत हैं सतगुरु रामपाल जी महाराज जिन्होंने धर्म के नाम पर हो रहे धंधे को उजागर किया। धर्मग्रंथों के यथार्थ ज्ञान के आधार पर प्रमाण देकर नकली गुरुओं की पोल खोलकर पाखंड पर चोट की। व्यवस्था में व्याप्त भ्रष्टाचार को सार्वजनिक कर उसे समूल उखाड़ फेकने का कठिन कार्य प्रारंभ किया। नशावृत्ति, दहेज जैसी कई सामाजिक कुरीतियों को बंद कराने के लिए महत्वपूर्ण कदम उठाए। रक्तदान, अन्नदान परमार्थ करने के लिए प्रेरित किया।
भक्ति मार्ग सुलझाने के लिए दिया ज्ञान चर्चा का निमंत्रण
संत रामपाल जी की मेहनत और परमेश्वर कबीर जी के आशीर्वाद से सतज्ञान बहुत तेज़ी से फैलता चला गया। सतभक्ति करने से भक्तों के दुख दूर होने लगे और हज़ारों की संख्या में श्रद्धालु संत रामपाल जी से दीक्षा लेने लगे। संत रामपाल जी ने पहले सर्व धर्मों के पवित्र ग्रंथों में से परमात्मा के ज्ञान और सही साधना के प्रमाण दिए। उसके बाद नकली पंथों और गलत साधनाओं में फंसे हुए श्रद्धालुओं को निकालने के लिए उन्ही नकली धर्मगुरुओं की पुस्तकों से उनके गलत ज्ञान की पोल खोल कर रख दी।
उन नकली संतों महंतों के विचार कबीर परमेश्वर जी की वाणी तथ शास्त्रों में प्रमाणित तथ्यों से भिन्न थे। जिन्हे देखकर शिक्षित भक्त समाज उन नकली ज्ञान बताने वाले पंथों, संतों, व महाऋषियों के समूह से निकलकर संत रामपाल जी से उपदेश ग्रहण करने के लिए आने लगे। जिससे संत रामपाल जी के अनुयायियों की संख्या दिन प्रतिदिन बढ़ती चली गयी। २००३ में संत रामपाल जी ने टीवी चैनलों के माध्यम से सतज्ञान देना शुरू किया और पाखंडी महात्माओं के ज्ञान का लाइव पर्दाफाश कर दिया।
संत रामपाल जी ने विश्व के सर्व धर्मगुरुओं को ज्ञान चर्चा का न्यौता दिया। भारत के चारों शंकराचार्यों को सतगुरु जी ने पत्र लिख कर ज्ञान चर्चा का आमंत्रण दिया। पर किसी की भी हिम्मत नहीं हुई संत रामपाल जी के साथ ज्ञान चर्चा करने की। न ही किसी संत ने सतगुरु रामपाल जी के ज्ञान का खंडन किया। संत रामपाल जी के ज्ञान के सामने सभी नकली संत फेल हो गए और उन्होंने अपने भक्तों को संत रामपाल जी की पुस्तकें पढ़ने से मना कर दिया। पर कुछ पंथ ऐसे भी थे जिन्होंने ज्ञान का उत्तर लाठी से देना उचित समझा और संत रामपाल जी के आश्रम पर हमला कर दिया।
तत्वदर्शी संत रामपाल जी महाराज के विरोध में नकली गुरुओं का एकजुट होना
धर्म ग्रंथों के आधार पर सतज्ञान को समाज में प्रसारित करने के कारण नकली धर्म गुरुओं के सिंहासन हिलने लगे। तत्वदर्शी संत रामपाल जी महाराज के विरोध में नकली गुरु एकजुट खड़े हो गए। दहेज, भ्रष्टाचार, नशावृत्ति जैसी कुप्रथाओं को समाप्त करने वाले ऐसे महान संत पर देशद्रोह जैसे कपोलकल्पित आरोपों को मंढकर भारतीय दंड संहिता की कई धाराओं के अंतर्गत मुकदमे दर्ज कर दिए गए। कबीर साहेब ने इस बारे में पहले ही कहा है कि मेरे संत जो सतज्ञान उपदेश करेंगे, नकली गुरु उनके साथ लड़ाई करेंगे –
जो मम संत सत उपदेश दृढ़ावै (बतावै), वाके संग सभि राड़ बढ़ावै।
सदग्रंथों में उल्लेखित प्रमाणों के आधार पर उन्हें गुरु पदवी प्राप्त हुई और वे बन्दीछोड़ तत्वदर्शी जगतगुरु संत रामपाल जी महाराज के रूप में जाने गए। पवित्र श्रीमदभगवतगीता के अध्याय 15 श्लोक 1 से 4 में तत्वदर्शी संत की पहचान दी गई है जिसे पूर्ण परमात्मा कविर्देव (कबीर साहेब) के वचनों से भी स्पष्ट समझा जा सकता है।
सतगुरु के लक्षण कहूं, मधूरे बैन विनोद।
चार वेद षट शास्त्र, कहै अठारा बोध।।
सतज्ञान के प्रचार में 2006 में जेल गए
संत रामपाल जी के अद्वितीय ज्ञान और अद्भुत आध्यात्मिक शक्ति से हारे हुए सब संत और महंत उनकी जान के दुश्मन बन गए। संत रामपाल जी को धमकी भरे फ़ोन और पत्र आने लगे। इसी बीच संत रामपाल जी ने आर्य समाज के प्रवर्तक महर्षि दयानन्द सरस्वती की पुस्तक “सत्यार्थ प्रकाश” में दर्ज कुछ आपत्तिजनक बातों पर टिप्पणी की। उन्होंने आर्य समाज के आचार्यों से प्रार्थना की कि सत्यार्थ प्रकाश पूर्ण रूप से शास्त्र विरुद्ध और समाज कल्याण के विरूद्ध व्याख्याओं से भरा है। इसे पढ़ने से तो सभ्य समाज में आग लग जायेगी। इस से भड़के हुए कुछ आर्य समाजी तत्वों ने बाकि संतो महंतो के साथ मिल कर संत रामपाल जी को जान से मारने व उनका प्रचार प्रसार बंद करवाने का निर्णय लिया।
पहले संत रामपाल जी पर झूठे आरोप लगाना शुरू किये गए और फिर ९ जुलाई को आश्रम को घेर लिया गया। भक्तों का राशन पानी काट दिया गया। 12 जुलाई 2006 को भारी संख्या में असामाजिक तत्वों को इकट्ठा करके इन लोगों ने सतलोक आश्रम करोंथा पर धावा बोल दिया। उस समय वहां पुलिस भी उपस्थित थी। पुलिस और आक्रमणकारियों की झड़प में एक आक्रमणकारी की मौत हो गयी। जिसका इल्जाम आश्रम के भक्तों तथा संत रामपाल जी पर लगाया गया और उन्हें गिरफ्तार कर लिया गया। आश्रम को जबरन खाली करवाया गया और सील कर दिया गया। आर्य समाजियों व मुख़्यमंत्री जी द्वारा आक्रमणकारियों को इनाम दिए गए। जिस संत ने परमार्थ के लिए सब कुछ त्याग दिया उस के साथ ऐसा षड्यंत्र और अन्याय किया गया।
संत रामपाल जी महाराज का संघर्ष: सतज्ञान के प्रचार में 2014 में जेल गए
2 साल जेल में रह कर संत रामपाल जी महाराज जी 2008 में बाहर आये। अपना प्रचार क्षेत्र बरवाला जिला हिसार बनाया और टीवी चैनल के माध्यम से सतज्ञान का प्रचार करने लगे। उनके शिष्यों की संख्या में भारी वृद्धि होने लगी और लाखों की संख्या में भक्त बरवाला आश्रम आने लगे। संत रामपाल जी अपने ऊपर लगे झूठे इल्जामों के केस में तारिख में भी जाया करते थे। कुछ एक जजों ने संत जी पर लगे हुए झूठे केस वापिस लेने के लिए रिश्वत मांगी जिस के लिए संत रामपाल जी ने इंकार कर दिया। इस से वह जज भी संत रामपाल जी के खिलाफ हो गए।
नवंबर 2014 में बीमार होने के कारण संत रामपाल जी कोर्ट में हाज़िर नहीं हो सके। उन्होंने अपनी बीमारी का मेडिकल सर्टिफिकेट भी जमा करवाया। जिसे नज़र अंदाज़ करते हुए कोर्ट ने उनके खिलाफ गैर जमानती वारंट जारी कर दिया और आश्रम में पुलिस फाॅर्स लगा दी। 40000 से भी ज्यादा पुलिस फाॅर्स ने बरवाला आश्रम को घेर लिया। संत रामपाल जी के भक्त भी आश्रम के गेट पर बैठ गए और अपने गुरु जी पर लगे हुए झूठे केसों का विरोध और CBI जांच की मांग करने लगे।
14 दिन तक पुलिस ने आश्रम को घेरे रखा, भक्तों का राशन, पानी और बिजली काट दी गयी। बच्चों, बूढ़ों, महिलाओं की फ़िक्र किये बिना उन्हें भूखा प्यासा रखा गया और 18 नवंबर 2014 को पुलिस ने आश्रम पर हमला कर दिया। बेरहमी से सबको पीटा गया जिससे एक बच्चे और पाँच महिलाओं की मौत हो गयी। सत्संग सुनने के लिए आये अनुयायियों में से करीब 1000 निर्दोष भक्तों को जेल में डाल दिया गया। संत रामपाल जी ने ठीक होने पर आत्मसमर्पण कर दिया लेकिन उन पर हत्या, देशद्रोह, और न जाने कितने झूठे केस बना दिए गए।
जेल से भी जारी है ज्ञान प्रचार
संत रामपाल जी महाराज ने अपने ऊपर इतने जुल्म होने के बाद भी परमार्थ का रास्ता नहीं छोड़ा। उन्होंने जेल से भी पुस्तकें लिखीं। उनके सत्संग कई कई टीवी चैनलों पर चलने लगे। भारत के सभी राज्यों और जिलों में उनके सत्संग होने लगे और श्रद्धालु ज्ञान समझकर नाम दीक्षा लेने लगे। आज भारत से बाहर भी उनका सतज्ञान पहुँच चुका है। अमेरिका, ब्रिटेन, ऑस्ट्रेलिया, दुबई और भी कई देशों में श्रद्धालु उनका ज्ञान समझकर नाम दीक्षा ले रहे हैं, उनकी पुस्तकें मंगवा रहे हैं। उनका दिया हुआ सतज्ञान पूरे विश्व में फ़ैल रहा है। दीक्षा लेने वालों को सर्व सुख आज भी प्राप्त हो रहे हैं, क्योंकि सिर्फ संत रामपाल जी के पास ही पूर्ण परमात्मा की सच्ची साधना है।
इस पृथ्वी पर सिर्फ संत रामपाल जी ही पूर्ण संत हैं फिर चाहे वे जेल में ही क्यों न हों। परमार्थ के लिए, हम जीवों के उद्धार के लिए ही उनको जेल जाना पड़ा है। इस तत्वज्ञान के प्रचार के लिए उन्होंने इतना संघर्ष किया है, उसे समझकर संत जी से नाम उपदेश लेना हमारा परम कर्तव्य बनता है क्योंकि मोक्ष प्राप्त करना ही इस मानव जीवन का प्रथम कर्तव्य है। उनके त्याग और बलिदान को हमें व्यर्थ नहीं होने देना है क्योंकि 71 साल पहले हमारे लिए ही वे इस पृथ्वी पर वे अवतरित हुए हैं।
71 वें अवतरण दिवस के उपलक्ष्य में विशेष कार्यक्रम
जगतगुरु तत्वदर्शी संत रामपाल जी महाराज जी के 71 वें अवतरण दिवस के उपलक्ष्य में 8 सितंबर 2021 को अवश्य देखिए विशेष कार्यक्रम साधना टीवी पर सुबह 11:00 बजे से 1:00 बजे तक और श्रद्धा चैनल पर सुबह 10:00 से 1:00 बजे तक।
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