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Showing posts from May, 2020

सच के साथ चलने वाले को कठिनाइयों का सामना करना पड़ता है

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सच के साथ चलने वाले को कठिनाइयों का सामना करना पड़ता है ईसा मसीह जी ने अपने जीवन में सच का साथ दिया तो उनके खिलाफ लोगों ने विरोध किया उन्हें दंड दिया और यहाँ तक कि उन्हें सूली में भी चढ़ना पड़ा  कबीर साहेब के साथ अन्याय  कबीर साहेब जी को 52 कसनी (52 बदमाशी) दी गयी। फिर भी उनका कुछ नहीं हुआ क्योंकि कबीर साहेब जी अविनाशी थे।लगभग 600 साल पहले जब परमेश्वर कबीर साहेब जीवों का उद्धार करने के लिए धरती पर आये तो पाखंडवाद का विरोध किया और सद्ग्रंथो में वर्णित सत्यभक्ति का प्रकाश फैलाया। हिन्दु धर्म में प्रचलित पाखंड पूजाएं, शास्त्र विरुद्ध साधनाओं और मुस्लिम धर्म में प्रचलित जीव हत्या का कबीर परमात्मा ने पुरजोर विरोध किया। उस समय परमात्मा के 64 लाख शिष्य हुए। दोनों धर्मों के और सभी वर्गों के व्यक्तियों ने परमेश्वर कबीर साहेब से उपदेश प्राप्त किया क्योंकि परमेश्वर कबीर साहेब के आशीर्वाद से सभी के दुखों का अंत हो जाता था। उन्ही शिष्यों में से एक था दिल्ली का सुल्तान सिकंदर लोधी। सिकंदर लोधी के जलन का रोग था जिसका इलाज वो हर पीर फ़कीर से करवा कर थक चुका ...

कबीर प्रकट दिवस (Kabir Sahib Prakat Divas 2020)

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आज हम आप को पूर्ण परमात्मा कबीर साहेब जी के कबीर प्रकट दिवस (Kabir Sahib Prakat Divas 2020) के बारे में जानकारी देंगे. कबीर प्रकट दिवस 2020 इस वर्ष 05 जून को मनाया जाएगा. समाज में तत्वज्ञान के अभाव में श्रद्धालु शंका व्यक्त करते हैं कि कबीर साहेब जी काशी वाला जुलाहा (धाणक) पूर्ण परमात्मा कैसे हो सकता है? लेकिन सत्य तो यही है कि वेदों में कविर्देव यही काशी वाला जुलाहा (धाणक) पूर्ण परमात्मा हैं। श्रद्धालुओं से निवेदन कृपया सच्चाई को समझें. कबीर साहेब जी का कलयुग में प्रकट होना कबीर साहेब जी कलयुग में भारत के काशी शहर के लहरतारा तालाब में ज्येष्ठ मास शुक्ल पूर्णमासी विक्रम संवत 1455 (सन् 1398) सुबह ब्रह्म मुहूर्त में कमल के फूल पर शिशु रूप में प्रकट हुए थे। अगर हम एक कमल के फूल पर छोटे-से पत्थर का टुकड़ा रखे तो नहीं टिक सकता। पर कबीर साहेब जी कमल के फूल पर छोटे से बालक रूप में प्रकट हुए। नीरू नीमा को मिले कबीर परमात्मा प्रतिदिन ब्रह्म मुहूर्त में नीरू, नीमा नामक पति-पत्नी लहरतारा तालाब पर स्नान करने जाते थे। एक बार नीरू, नीमा जिनके कोई संतान नहीं थी स्नान करने जा रहे...

मानव के उत्थान!

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मानव के उत्थान जानकारी! भगवान ने सभी मनुष्यों को समान रूप से बनाया है। ईश्वर ने ही मनुष्य के अस्तित्व के लिए उपयुक्त वातावरण तैयार किया है। हालांकि मनुष्य की हरकतों ने इन दोनों में गड़बड़ी पैदा कर दी है। पुरुषों ने अपनी सीमाएं बनाईं और अपने धर्म, जाति, पंथ, आर्थिक स्थिति और पता नहीं क्या क्या के आधार पर कई मतभेदों को जन्म दिया। वह अपने कद और स्तर के लोगों के साथ मिलना-जुलना पसंद करता है और अपने से नीचे स्तर के लोगों की अनदेखी करता है। मानव द्वारा इस्तेमाल में लाई जाने वाली प्रौद्योगिकी की प्रगति ने पर्यावरण के सामान्य कामकाज में हस्तक्षेप किया है जिससे यह विनाश के कगार पर पहुँच गई है। मानव और संस्कृति! मानव और संस्कृति आदमी की परवरिश पर संस्कृति का बड़ा प्रभाव होता है। यह काफी हद तक एक व्यक्ति के दिमाग और संपूर्ण व्यक्तित्व के आकार को प्रभावित करती है। यही कारण है कि विभिन्न संस्कृतियों के लोगों की अलग-अलग सोच होती है। एक चीज या स्थिति जो एक संस्कृति से संबंधित लोगों को सामान्य दिखाई देती है वह दूसरों को बिल्कुल विचित्र लग सकती है। भारत के लोगों के मन में उनकी संस्कृति...

शिक्षा का स्तर!

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शिक्षा क्या है और वर्तमान में शिक्षा स्तर! शिक्षा' शब्द का अर्थ है-अध्ययन तथा ज्ञान ग्रहण करना। वर्तमान युग में शिक्षण के लिए ज्ञान, विद्या, एजूकेशन आदि अनेक पर्यायवाची शब्दों का प्रयोग होता है। शिक्षा चेतन या अचेतन रूप से मनुष्य की रूचियों समताओं, योग्यताओं और सामाजिक मूल्यों को ध्यान में रखते हुए, आवश्यकता के अनुसार स्वतंत्रता देकर उसका सर्वागींण विकास करती है। शिक्षा हमारे सोचने, रहने और जीने के ढंग को बदलने में सहायता करती है। आधुनिक शिक्षा प्रणाली हमें धनी बना सकती है। परन्तु उसमें नीति और संस्कारों का नितांत अभाव मिलता है। इसका स्तर गिर ररहा है। हमारी प्राचीन शिक्षा पद्धति हमें प्रकृति और सभी प्राणियों से संपर्क बनाए रखने में सहायता करती थी। यह संस्कारों, नीतियों और अपने परिवेश को बेहतर समझने में सहायक थी। मनुष्य प्रकृति के बहुत समीप था। परन्तु आधुनिक शिक्षा आज जीविका कमाने का साधन मात्र बनकर रह गई है। संस्कार, नीतियाँ और परंपराएँ बहुत पीछे छूट गए हैं। आधुनिक शिक्षा प्रणाली यथार्थ और व्यवहारिक ज्ञान से बहुत दूर है। यह मात्र आधुनिकता की बात करती है। परन्तु अध्यात्म और भावनाओ...

सच्चा परमात्मा कोन?

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भगवान की खोज! वर्तमान में हर मानव किसी ना किसी से दुखी हैं वह सुख रहने के लिए हमेशा प्रयत्न करता रहता है लेकिन क्या वह सुखी रहे पता है परमार्थ ही ऐसी चीजें जिससे आत्मा सुख की अनुभूति कर सकते हैं भगवान की भक्ति करने से ही आत्मा सुखी रह सकती हैं नहीं तो चाय उसके पास धन की कमी ना हो फिर भी यहां कोई सुखी नहीं है और मानव परमात्मा प्राप्ति के लिए न जाने कहां कहां भटकता है कहीं मंदिर जाता है तो कहीं मस्जिद जाता है कहीं चर्चा द्वारा सभी स्थानों पर भगवान को खोजने के लिए जाता है लेकिन क्या उसे भगवान मिलते हैं नहीं,  क्योंकि हम जो साधना करते हैं वह शास्त्र विरुद्ध उससे ना तो कुछ सिद्धि प्राप्त है और ना कोई परमात्मा प्राप्ति हैं अतः वेर्थ हैं  परमात्मा मंदिर मस्जिदों में नहीं मिलते  हमें केवल हमारे धर्म गुरु ने अंधविश्वास मेंं धकेल रखा है भगवान कोई  पशु नहीं है जो पुजारी मंदिर में बांध देगा कबीर साहेब कहते हैं कि - पत्थर पूजे हरि मिले, तो मैं पूजू पहाड़| नहीं तो वह चक्की सही, जो पीस खाये संसार ||  पूर्ण परमात्मा की भक्ति के लिए शास्त्र अनुकूल साधना करना चाहि...

दहेज प्रथा एक अभिशाप!

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दहेज का अर्थ है जो सम्पत्ति, विवाह के समय वधू के परिवार की तरफ़ से वर को दी जाती है। दहेज को उर्दू में जहेज़ कहते हैं। यूरोप, भारत, अफ्रीका और दुनिया के अन्य भागों में दहेज प्रथा का लंबा इतिहास है। भारत में इसे दहेज, हुँडा या वर-दक्षिणा के नाम से भी जाना जाता है तथा वधू के परिवार द्वारा नक़द या वस्तुओं के रूप में यह वर के परिवार को वधू के साथ दिया जाता है। आज के आधुनिक समय में भी दहेज़ प्रथा नाम की बुराई हर जगह फैली हुई है। पिछड़े भारतीय समाज में दहेज़ प्रथा अभी भी विकराल रूप में है। हत्या ⬇️ देश में औसतन हर एक घंटे में एक महिला दहेज संबंधी कारणों से मौत का शिकार होती है और वर्ष 2007 से 2011 के बीच इस प्रकार के मामलों में काफी वृद्धि देखी गई है। राष्ट्रीय अपराध रिकॉर्ड ब्यूरो के आंकड़े बताते हैं कि विभिन्न राज्यों से वर्ष 2012 में दहेज हत्या के 8,233 मामले सामने आए। आंकड़ों का औसत बताता है कि प्रत्येक घंटे में एक महिला दहेज की बलि चढ़ रही है। कानून ⬇️ दहेज निषेध अधिनियम, 1961 के अनुसार दहेज लेने, देने या इसके लेन-देन में सहयोग करने पर 5 वर्ष की कैद और 15,000 रुपए के जुर्मान...

नशा जीवन का नाश कर देता है

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नशा से हानि  नशा एक ऐसी बुराई है जो हमारे समूल जीवन को नष्ट कर देती है। नशे की लत से पीड़ित व्यक्ति परिवार के साथ समाज पर बोझ बन जाता है। युवा पीढ़ी सबसे ज्यादा नशे की लत से पीड़ित है। सरकार इन पीड़ितों को नशे के चुंगल से छुड़ाने के लिए नशा मुक्ति अभियान चलाती है, शराब और गुटखे पर रोक लगाने के प्रयास करती है। नशे के रूप में लोग शराब, गाँजा, जर्दा, ब्राउन शुगर, कोकीन, स्मैक आदि मादक पदार्थों का प्रयोग करते हैं, जो स्वास्थ्य के साथ सामाजिक और आर्थिक दोनों लिहाज से ठीक नहीं है। नशे का आदी व्यक्ति समाज की दृष्टी से हेय हो जाता है और उसकी सामाजिक क्रियाशीलता शून्य हो जाती है, फिर भी वह व्यसन को नहीं छोड़ता है। ध्रूमपान से फेफड़े में कैंसर होता हैं, वहीं कोकीन, चरस, अफीम लोगों में उत्तेजना बढ़ाने का काम करती हैं, जिससे समाज में अपराध और गैरकानूनी हरकतों को बढ़ावा मिलता है। इन नशीली वस्तुओं के उपयोग से व्यक्ति पागल और सुप्तावस्था में चला जाता है। तम्बाकू के सेवन से तपेदकि, निमोनिया और साँस की बीमारियों का सामना करना पड़ता है। इसके सेवन से जन और धन दोनों की हानि होती है। मस्तिष्क पर ...

रेल्वे स्टेशन बोर्ड पर "समुद्र तल से ऊंचाई" क्यु लिखीं होतीं हैं?

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रेलवे स्टेशन बोर्ड पर “समुद्र तल से ऊँचाई” क्यों लिखी होती है? समुद्र तल की ऊँचाई से ट्रेन के ड्राइवर को कोई भी मदद नहीं मिलती है। गौर करें , ज्यादातर स्टेशन स्वतंत्रता के पूर्व के हैं, जिस वक़्त वाष्प इंजन चला करते थे जिसमें गियर नहीं होता था ( डीजल और विद्युत लोको में भी गियर नहीं होता है - थ्रोटल और टैप चेंजर होता है जो गियर से बिल्कुल अलग है) अतःलोको पायलट को मदद करने वाली बात बेतुकी और हास्यास्पद है। समुद्र तल की ऊँचाई का बोर्ड - मुख्यतः सिविल इंजीनियर हेतु लिखा होता एक रेफेरेंस पॉइंट के रूप में । यह स्टेशन निर्माण के समय ही लिखा जाता है । मान लें कि तीन लगातार स्टेशन अ, ब और स हैं। तीनों स्टेशन 10 -10 किलोमीटर के फासले पर हैं स्टेशन “अ” की ऊंचाई 100 मीटर है स्टेशन “ब” की ऊंचाई 100 मीटर है स्टेशन “स” की ऊंचाई 160 मीटर है तो स्टेशन “अ” से स्टेशन “ब” की ट्रैक लेवल होगी और स्टेशन “ब” से स्टेशन “स” की ट्रैक लेवल नहीं होगी बल्कि (160 -100)/ 10X 1000 = 6/1000 या 1/166 चढ़ाई (rising gradient ) वाली होगी। यह चढ़ाई सामान्यतः अनुमत ग्रेडिएंट 1/200 से ज्यादा है अतः: “ब” से “स” ट्रेन जाएगी तो पी...

Motivation

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आज हम आपके साथ कुछ ऐसे मोटिवेशनल कोट्स (प्रेरणादायक विचार) Motivational Quotes & Thoughts in Hindi शेयर करेंगे जिन्हें अगर आप अपने निजी जीवन में implement करेंगे तो निश्चित ही आप सफलता (Success) की ओर बढ़ेंगे। आप मेहनत तो कर रहे है लेकिन सफलता की तरफ जाते दिखाई नहीं दे रहे इसकी क्या वजह हो सकती है, इसकी वजह है किस्मत आपको आजमा रही है की आप कितना सह सकते है, आपके अन्दर कितनी हिम्मत है। आज के इन Inspirational Quotes & Thoughts को पढने के बाद आप काफी Motivate होंगे।आज हम आपके साथ कुछ ऐसे मोटिवेशनल कोट्स (प्रेरणादायक विचार) Motivational Quotes & Thoughts in Hindi शेयर करेंगे जिन्हें अगर आप अपने निजी जीवन में implement करेंगे तो निश्चित ही आप सफलता (Success) की ओर बढ़ेंगे। आप मेहनत तो कर रहे है लेकिन सफलता की तरफ जाते दिखाई नहीं दे रहे इसकी क्या वजह हो सकती है, इसकी वजह है किस्मत आपको आजमा रही है की आप कितना सह सकते है, आपके अन्दर कितनी हिम्मत है। आज के इन Inspirational Quotes & Thoughts को पढने के बाद आप काफी Motivate होंगे।इस पोस्ट के Motivational Quotes in Hindi आपको...

Life motiveshan

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जिंदगी क्या है कुछ वक्त का एक कारवां है, जो चल पड़ता है किसी अनजान मंजिल को पाने के लिए समय के साथ साथ मंजिलें भी बदलती रहती हैं रास्ते बदलने पड़ते हैं इन मंजिलों तक जाने के लिएबचपन जवानी बुढ़ापा कुछ पड़ाव हैं जिंदगी के रास्ते में इन पड़ावों से गुजरना पड़ता है जिंदगी बिताने के लिए बहुत से साथी मिलते रहते हैं कुछ विछड़ भी जाते हैं मगर रुकना मना है बिछड़ों को वापिस लाने के लिए रास्ते भर किसी एक सही साथी की दरकार रहती है वर्ना मंजिल पे भी कुछ नहीं बचता सिवा पछताने के लिए बस जान लो कि ताउम्र सिर्फ चलते रहने से कुछ नहीं होता एक सही दिशा जरूरी है सही मंजिल तक जाने के लिए

तत्व ज्ञान क्या है जाने

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“पवित्रा चारों वेदों अनुसार साधना का परिणाम केवल स्वर्ग-महास्वर्ग प्राप्ति, मुक्ति नहीं” पवित्रा गीता अध्याय 9 के श्लोक 20, 21 में कहा है कि जो मनोकामना (सकाम) सिद्धि के लिए मेरी पूजा तीनों वेदों में वर्णित साधना शास्त्रा अनुकूल करते हैं वे अपने कर्मों के आधार पर महास्वर्ग में आनन्द मना कर फिर जन्म-मरण में आ जाते हैं अर्थात् यज्ञ चाहे शास्त्रानुकूल भी हो उनका एक मात्रा लाभ सांसारिक भोग, स्वर्ग, और फिर नरक व चौरासी लाख जूनियाँ ही हैं। जब तक तीनों मंत्रा (ओ3म तथा तत् व सत् सांकेतिक) पूर्ण संत से प्राप्त नहीं होते। अध्याय 9 के श्लोक 22 में कहा है कि जो निष्काम भाव से मेरी शास्त्रानुकूल पूजा करते हैं, उनकी पूजा की साधना की रक्षा मैं स्वयं करता हूँ, मुक्ति नहीं।