सच के साथ चलने वाले को कठिनाइयों का सामना करना पड़ता है
सच के साथ चलने वाले को कठिनाइयों का सामना करना पड़ता है
ईसा मसीह जी ने अपने जीवन में सच का साथ दिया तो उनके खिलाफ लोगों ने विरोध किया उन्हें दंड दिया और यहाँ तक कि उन्हें सूली में भी चढ़ना पड़ा
कबीर साहेब के साथ अन्याय
कबीर साहेब जी को 52 कसनी (52 बदमाशी) दी गयी। फिर भी उनका कुछ नहीं हुआ क्योंकि कबीर साहेब जी अविनाशी थे।लगभग 600 साल पहले जब परमेश्वर कबीर साहेब जीवों का उद्धार करने के लिए धरती पर आये तो पाखंडवाद का विरोध किया और सद्ग्रंथो में वर्णित सत्यभक्ति का प्रकाश फैलाया। हिन्दु धर्म में प्रचलित पाखंड पूजाएं, शास्त्र विरुद्ध साधनाओं और मुस्लिम धर्म में प्रचलित जीव हत्या का कबीर परमात्मा ने पुरजोर विरोध किया। उस समय परमात्मा के 64 लाख शिष्य हुए। दोनों धर्मों के और सभी वर्गों के व्यक्तियों ने परमेश्वर कबीर साहेब से उपदेश प्राप्त किया क्योंकि परमेश्वर कबीर साहेब के आशीर्वाद से सभी के दुखों का अंत हो जाता था। उन्ही शिष्यों में से एक था दिल्ली का सुल्तान सिकंदर लोधी।
सिकंदर लोधी के जलन का रोग था जिसका इलाज वो हर पीर फ़कीर से करवा कर थक चुका था। उसका वो रोग परमात्मा कबीर साहेब जी की शरण में आने के बाद ही ठीक हुआ था। उसी के सामने कबीर परमात्मा ने स्वामी रामानंद जी और एक मृत गाय को जीवित किया थ। तब से सिकंदर लोधी, कबीर साहेब जी को अल्लाह मानता था। इस कारण से सिकंदर लोधी का धार्मिक गुरु शेख तकि कबीर साहेब से ईर्ष्या करता था । कबीर साहेब को अपने रास्ते से हटाने के लिए उसने कई बार उन्हें मरवाने की नाकाम कोशिश की।
वर्तमान में संत रामपालजी के साथ अन्याय
वर्तमान में संत रामपालजी के साथ भी अन्याय हो रहा है उन्हें झूठे मुकदमों मे फसाया गया है उनके साथ भी बहुत ही अन्याय हुआ है
लेकिन इतिहास गवाह है कि सच का साथ देने वाले के साथ अन्याय हुआ है लेकिन बाद में उन्हें याद किया जाता है और उनकी पूजा की जाती है
आने वाले समय में विश्व में संत रामपालजी महाराज जी को भगवान मानकर पूजा जाएगा लेकिन अभी भी समय है उन्हें समझे अपने कर्म खराब ना करे और सच के साथ चले क्युकि सच की नाव डूबती नहीं है
वर्तमान में विश्व में संत रामपालजी ही पुर्ण संत है
अधिक जानकारी के लिए पढ़े पुस्तक ज्ञान गंगा
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