जीवन का सार
जीवन का सार
यह पोस्ट आध्यात्मिक ज्ञान के अनुसार जीवन को सफल बनाने और मानव जीवन का मूल उद्देश्य का पता कराने के लिए हैं कि आखिरकार इंसान जन्म लेता है और मरता है अपने जीवन में बहुत कुछ करता है दिन - रात लगा रहता है, पैसा कमाता है, बिल्डिंगे बना लेता है पुरी जिंदगी भाग - दोड़ मे निकल जाती है लेकिन किसी ने विचार नहीं किया कि हम जो पेसा कमाते हैं क्या वह हमेशा हमारा रहता है, क्या हम हमेशा अमर रहेंगे जो इन पैसों को अपना बनाये रखेंगे |कभी दोस्तों विचार करना कि हम क्यों जन्म लेते हैं और क्यों मरते हैं, कुछ लोग कहते हैं कि ऐसा काम करो कि दुनियां याद रखें |लेकिन दोस्तों सच्चाई यह है कि दुनियां सिर्फ तोड़े समय ही याद करतीं हैं, असली मेन उद्येश्य मानव जीवन का कल्याण कराना है जो सिर्फ सत्य भक्ति से ही होता है अन्य से नहीं और सत्य भक्ति सिर्फ़ अधिकारी संत ही बता सकता है अन्य संत नहीं |
मानव जीवन का कल्याण सभी को जरूरी है चाये वह राजा हो या रंक सब को भक्ति करने से ही मानव जीवन का कल्याण हों सकता है |
इसके साथ बात करते हैं बॉलिवुड के अभिनेता मनोज वाजपेयी की सुनने में आया है कि वो अपने जीवन को लेकर बहुत चिंतित हैं तो कृपया इस पोस्ट को जरूर पढें, में अपने छोटे से विचार प्रस्तुत करना चाहूँगा |
मनोज वाजपेयी
मनोज बाजपेयी भारतीय हिन्दी फ़िल्म उद्योग बॉलीवुड के एक जाने माने अभिनेता हैं। मनोज को प्रयोगकर्मी अभिनेता के रूप में जाने जाते है। उन्होने अपना फ़िल्मी कैरियर १९९४ मे शेखर कपूर निर्देशित अन्तर्राष्ट्रीय ख्याति प्राप्त फ़िल्म बैंडिट क्वीन से शुरु किया। बॉलीवुड मे उनकी पहचान १९९८ मे राम गोपाल वर्मा निर्देशित फ़िल्म सत्या से बनी। इस फ़िल्म ने मनोज को उस दौर के अभिनेताओं के समकक्ष ला खङा किया। इस फ़िल्म के लिये उन्हें सर्वश्रेष्ठ सह-अभिनेता का राष्ट्रीय पुरस्कार भी प्राप्त हुआ।
Manoj sir
मनोज बाजपेयी का जन्म २३ अप्रिल १९६९ को बिहार केपश्चिमी चंपारण के छोटे से गांव बेलवा बहुअरी में हुआ था। उनकी प्रारम्भिक शिक्षा के.आर. हाई स्कूल, बेतिया से हुई। इसके बाद मनोज दिल्ली चले गये और रामजस कॉलेज से अपनी आगे की पढाई की। उन्हे राष्ट्रीय नाट्य विद्यालय मे तीन कोशिशों के बावजूद प्रवेश नही मिल सका। इसके बाद उन्होने बैरी जॉन के साथ रंगमंच किया। मनोज ने बैरी जॉन के मार्गदर्शन में स्ट्रीट चिल्ड्रेन के साथ काफी काम किया है।
2000 - फ़िल्मफ़ेयर सर्वश्रेष्ठ अभिनेता पुरस्कार - आलोचक - शूल-
फ़िल्मफ़ेयर सर्वश्रेष्ठ अभिनेता पुरस्कार - आलोचक फ़िल्मफ़ेयर पत्रिका द्वारा प्रति वर्ष दिया जाने वाला पुरस्कार है। यह हिन्दी फ़िल्म में सबसे बेहतर अभिनय के लिये फ़िल्म के अभिनेता को फ़िल्मफ़ेयर पुरस्कार समारोह में दिया जाता है।
1999 - फ़िल्मफ़ेयर सर्वश्रेष्ठ अभिनेता पुरस्कार - आलोचक - सत्या-
फ़िल्मफ़ेयर सर्वश्रेष्ठ अभिनेता पुरस्कार - आलोचक फ़िल्मफ़ेयर पत्रिका द्वारा प्रति वर्ष दिया जाने वाला पुरस्कार है। यह हिन्दी फ़िल्म में सबसे बेहतर अभिनय के लिये फ़िल्म के अभिनेता को फ़िल्मफ़ेयर पुरस्कार समारोह में दिया जाता है।
मनोज बाजपेयी ने अपना कैरियर दूरदर्शन पर प्रसारित होने वाले धारावाहिक स्वाभिमान के साथ शुरु किया। इसी धारावाहिक से आशुतोष राणा और रोहित रॉय को भी पहचान मिली। बैंडिट क्वीन की कास्टिंग के दौरान तिग्मांशु धूलिया ने मनोज को पहली बार शेखर कपूर से मिलवाया था। इस फ़िल्म मे मनोज ने डाकू मान सिंह का चरित्र निभाया था। १९९४ मे आयी फ़िल्म द्रोह काल और १९९६ मे आयी दस्तक फ़िल्म मे भी मनोज ने छोटे किरदार निभाये। १९९७ मे मनोज ने महेश भट्ट निर्देशित तमन्ना फ़िल्म की। इसी साल राम गोपाल वर्मा निर्देशित और संजय दत्त अभिनीत फ़िल्म दौड़ मे भी मनोज दिखे। १९९८ मे राम गोपाल वर्मा की फ़िल्म सत्या के बाद मनोज ने कभी वापस मुड़ कर नहीं देखा। इस फ़िल्म मे उनके द्वारा निभाये गये भीखू म्हात्रे के किरदार के लिये उन्हे कई पुरस्कार मिले जिसमे सर्वश्रेष्ठ सह-अभिनेता का राष्ट्रीय पुरस्कार और फ़िल्मफेयर का सर्वोत्तम अभिनेता पुरस्कार (समीक्षक) मुख्य हैं। १९९९ मे आयी फ़िल्म शूल मे उनके किरदार समर प्रताप सिंह के लिये उन्हे फ़िल्मफेयर का सर्वोत्तम अभिनेता पुरस्कार मिला। अमृता प्रीतम के मशहूर उपन्यास 'पिंजर' पर आधारित फ़िल्म पिंजर के लिये उन्हे एक बार फिर राष्ट्रीय पुरस्कार मिला।
२०१० मे आयी प्रकाश झा निर्देशित फ़िल्म राजनीति मे उनके द्वारा निभाये वीरेन्द्र प्रताप उर्फ वीरू भैया ने अभिनय की एक नयी परिभाषा गढ दी। यह किरदार महाभारत के पात्र दुर्योधन से काफी मिलता-जुलता है। इस फ़िल्म के प्रीमियर शो बाद कैटरीना कैफ अपनी सीट से उठीं और उन्होंने मनोज बाजपेयी के पैर छू लिये। कैटरीना ने कहा उन्होंने ऐसी एक्टिंग पहले कहीं नहीं देखी जैसी मनोज ने फ़िल्म में की हैं।[1] २०१२ मे आयी फ़िल्म गैंग्स ऑफ वासेपुर – भाग 1 मे मनोज सरदार खान के किरदार में दिखे। इस फ़िल्म को और मनोज के किरदार को समीक्षकों की तरफ से खाफी सराहना मिली।
यह सब मनोज सर के जीवन की बाते हैं अब हम मेन बात करते हैं कि चाये इंसान कितना भी बड़ा हों जाये कितना भी पेसा कमाले, लेकिन अपने जीवन का कल्याण करना पैसो या किसी चीज़ की उन्नति करने से नहीं हों सकता |
मानव जीवन का कल्याण सिर्फ़ सत्य भक्ति करने से ही होता है |
अब सवाल यह उठता है कि भक्ति किसकी करे कोन हैं भगवान कैसा हैं किसने देखा हैं |
और सबसे काश बात है कि वर्तमान में अन्धविश्वास और पाखंड वाद ज्यादा चल रहा हैं तो किस संत के द्वारा सत्य भक्ति करे |
इन सबको आपको प्रमाण सहित बतायेंगे की किस संत के द्वारा आप नाम ले सकते हैं और वर्तमान में वह संत कोन हैं
तो चलिये जानते हैं.........................
‘‘भक्ति किस प्रभु की करनी चाहिए’’
‘‘भक्ति किस प्रभु की करनी चाहिए’’ गीता अनुसार।
इसलिए सूक्ष्मवेद में कहा कि :-
“भजन करो उस रब का, जो दाता है कुल सब का”
श्रीमद् भगवत् गीता अध्याय 15 श्लोक 1 से 4 तथा 16.17 में कहा है कि
यह संसार ऐसा है जैसे पीपल का वृक्ष है। जो संत इस संसार रूपी पीपल के वृक्ष
की मूल (जड़ों) से लेकर तीनों गुणों रूपी शाखाओं तक सर्वांग भिन्न-भिन्न बता
देता है। (सः वेद वित्) वह वेद के तात्पर्य को जानने वाला है अर्थात् वह तत्वदर्शी
सन्त है।
अपने द्वारा रची सृष्टि का ज्ञान तथा वास्तविक आध्यात्म ज्ञान परमात्मा स्वयं पृथ्वी पर प्रकट होकर अपने मुख कमल से सुनाता है।
अनुवाद आर्यसमाज के प्रवर्तक महर्षि दयानंद तथा उसके अनुयाईयों ने
किया है। उसकी त्राटियाँ लेखक (संत रामपाल दास) ने शुद्ध की हैं।
ऋग्वेद मण्डल नं. 9 सूक्त 86 मन्त्रा 26.27, ऋग्वेद मण्डल नं. 9 सूक्त 82
मन्त्रा 1.2, ऋग्वेद मण्डल नं. 9 सूक्त 96 मन्त्रा 16 से 20, ऋग्वेद मण्डल नं. 9 सूक्त
94 मन्त्रा 1, ऋग्वेद मण्डल नं. 9 सूक्त 95 मन्त्रा 2, ऋग्वेद मण्डल नं. 9 सूक्त 54
मन्त्रा 3, ऋग्वेद मण्डल नं. 9 सूक्त 20 मन्त्रा 1 में प्रमाण है कि जो सर्व ब्रह्माण्डों
का रचनहार, सर्व का पालनहार परमेश्वर है। वह सर्व भुवनों के ऊपर के लोक में
बैठा है। (ऋग्वेद मण्डल नं. 9 सूक्त 54 मन्त्रा 3) वह परमात्मा वहाँ से गति करके
अर्थात् सशरीर चलकर यहाँ पृथ्वी पर आता है, भक्तों के संकटों का नाश करता
है। उसका नाम कविर्देव अर्थात् कबीर परमेश्वर है। यहाँ पर अच्छी आत्माओं को
मिलता है, उनको तत्वज्ञान अपने मुख कमल से बोलकर बताता है। वह परमात्मा
ऊपर के लोक में बैठा है। (ऋग्वेद मण्डल नं. 9 सूक्त 86 मन्त्रा 26.27ए मण्डल 82
मन्त्रा 1.2 तथा मण्डल नं. 9 सूक्त 20 मन्त्रा 1)
परमात्मा पृथ्वी पर कवियों की तरह आचरण करता हुआ विचरण करता है।
(ऋग्वेद मण्डल नं. 9 सूक्त 94 मन्त्रा 1)
परमात्मा अपने मुख से वाणी बोलकर साधकों को भक्ति करने की प्रेरणा
करता है। परमात्मा भक्ति के गुप्त मन्त्रों का आविष्कार करता है। (ऋग्वेद मण्डल
नं. 9 सूक्त 95 मन्त्रा 2)
परमात्मा तत्वज्ञान को कविर्वाणी (कबीर वाणी) द्वारा लोकोक्तियों, दोहों,
चौपाईयों द्वारा बोलकर सुनाता है। वह कविर्देव (कबीर परमेश्वर) है जो सन्त रूप
में प्रकट होता है। उस परमेश्वर द्वारा ऋषि या सन्तों द्वारा रची असँख्यों वाणियाँ
जो तत्वज्ञान है, वे उसके अनुयाईयों के लिए अमृत तुल्य आनंददायक होती हैं।
वह परमेश्वर प्रसिद्ध कवियों में से भी एक प्रसिद्ध कवि की पदवी भी प्राप्त
करते हैं। उनको कवि कहते हैं, परंतु वह परमात्मा होता है। वह परमात्मा तीसरे
मुक्ति धाम (सत्यलोक) में विराजमान है। जैसे मनुष्य अन्य वस्त्रा धारण करता है,
ऐसे ही वह परमात्मा भिन्न-भिन्न रूपों में पृथ्वी पर प्रकट होता है। उपरोक्त ऋग्वेद
के मन्त्रों से स्पष्ट है कि परमात्मा अपने अमर धाम से चलकर पृथ्वी पर प्रकट होता
है। वह अच्छी आत्माओं को मिलता है। वह तत्वदर्शी सन्त की भूमिका करके तत्व
ज्ञान दोहों, चौपाईयों, शब्दों द्वारा बोलता है। उस परमेश्वर ने सन् 1398 से 1518
तक 120 वर्ष पृथ्वी पर भारत वर्ष की पावन धरती पर काशी शहर में जुलाहे
(धाणक) के रूप में रहकर तत्वज्ञान बताया था।
कबीर, अक्षर पुरूष एक पेड़ है, क्षर पुरूष वाकी डार।
तीनों देवा शाखा हैं, पात रूप संसार।।
विशेष :- कबीर वाणी पुस्तक में एक वाणी ऐसे भी लिखी है :-
कबीर, अक्षर पुरूष वृक्ष का तना है, क्षर पुरूष है डार।
त्रायदेव शाखा भए, पात जानों संसार।।
सरलार्थ :- वृक्ष का जो हिस्सा पृथ्वी से बाहर दिखाई देता है। उसकी
जानकारी बताई है कि वृक्ष का जो तना होता है, उसे तो “अक्षर पुरूष” जानें।
तने के ऊपर कई मोटी डार निकलती हैं, उनमें से एक डार को ‘‘क्षर पुरूष‘‘
जानें। फिर उस डार के मानों तीन शाखा निकली हैं। वे तीनों देवता :- (रजगुण
ब्रह्मा जी, सतगुण विष्णु जी तथा तमगुण शिव जी) जानें और उन शाखाओं पर
लगे पत्ते जीव-जन्तु जानें।
परमेश्वर कबीर जी ने तत्वज्ञान में सब ज्ञान बताया है। गीता अध्याय 4
श्लोक 32 में भी कहा है कि यज्ञों अर्थात् धार्मिक अनुष्ठानों की जानकारी (ब्रह्मणः
मुखे) सच्चिदानन्द घन ब्रह्म अर्थात् परम अक्षर ब्रह्म ने अपने मुख कमल से बोली,
वाणी में विस्तार के साथ कही है, वह तत्वज्ञान है।
गीता अध्याय 4 श्लोक 34 में कहा है कि जो तत्वज्ञान परमात्मा स्वयं बताता
है। उसको उसके कृपा पात्रा सन्त ही समझते हैं। उस तत्वज्ञान को तू तत्वदर्शी
सन्तों के पास जाकर समझ। उनको दण्डवत् प्रणाम (पृथ्वी पर पेट के बल लम्बा
लेटकर प्रणाम) करके, नम्रतापूर्वक प्रश्न करने से वे तत्वदर्शी सन्त तत्वज्ञान का
उपदेश करेंगे।
परमेश्वर ने यह तत्वज्ञान स्वयं पृथ्वी पर प्रकट होकर बताया था। गीता
अध्याय 15 श्लोक 1 में तत्वदर्शी सन्त की पहचान बताई है कि जो सन्त संसार
रूपी वृक्ष को मूल (जड़) से लेकर सर्व अंगों को जानता है, वह तत्वदर्शी सन्त है।
अब जानें संसार रूपी वृक्ष के सर्वार्ंग :-
1. मूल (जड़) :- यह परम अक्षर ब्रह्म है जो सबका मालिक है। सबकी
उत्पत्ति करता है। सबका धारण-पोषण करने वाला है जिसकी जानकारी गीता
अध्याय 8 श्लोक 1 के प्रश्न का उत्तर गीता अध्याय 8 के ही श्लोक 3ए 8ए 9ए 10 तथा
20ए 21ए 22 में दिया है। उसी का वर्णन गीता अध्याय 15 श्लोक 17 में है। जैसे गीता
अध्याय 15 श्लोक 16 में दो पुरूष बताए हैं :- एक “क्षर पुरूष” दूसरा “अक्षरपुरूष”, ये दोनों तथा इनके अन्तर्गत जितने शरीरधारी प्राणी हैं, वे सब नाशवान
हैं। जीव आत्मा तो किसी की नहीं मरती।
गीता अध्याय 15 के ही श्लोक 17 में कहा है कि (उत्तम पुरूषः) अर्थात्
पुरूषोत्तम तो (अन्यः) अन्य ही है जिसे (परमात्मा इति उदाहृतः) परमात्मा कहा
जाता है (यः लोक त्रायम्) जो तीनों लोकों में (अविश्य विभर्ती) प्रवेश करके सबका धारण-पोषण करता है (अव्ययः ईश्वरः) अविनाशी परमेश्वर है, यह परम अक्षर ब्रह्म संसार रूपी वृक्ष की मूल (जड़) रूप परमेश्वर है। यह वह परमात्मा है जिसके
विषय में सन्त गरीब दास जी ने कहा है :-
“भजन करो उस रब का, जो दाता है कुल सब का”
यह असँख्यों ब्रह्माण्डां का मालिक है। यह क्षर पुरूष तथा अक्षर पुरूष का
भी मालिक तथा उत्पत्तिकर्ता है।
2. अक्षर पुरूष :- यह संसार रूपी वृक्ष का तना जानें। यह 7 शंख ब्रह्माण्डों
का मालिक है, नाशवान है।
3. क्षर पुरूष :- यह गीता ज्ञान दाता है, इसको “क्षर ब्रह्म” भी कहते हैं।
इसे संसार वृक्ष की डार जानों। यह केवल 21 ब्रह्माण्डों का मालिक है, नाशवान है।
4. तीनों देवता (रजगुण ब्रह्मा, सतगुण विष्णु तथा तमगुण शिव) संसार रूपी
वृक्ष की तीन शाखाऐं :- ये एक ब्रह्माण्ड में बने तीन लोकों (पृथ्वी लोक, पाताल
लोक तथा स्वर्ग लोक) में एक-एक विभाग के मन्त्रा हैं, मालिक हैं।
जैसे = रजगुण विभाग के श्री ब्रह्मा जी मालिक हैं, जिसके प्रभाव से सर्व
प्राणी सन्तानोत्पत्ति करते हैं। सतगुण विभाग के श्री विष्णु जी मालिक हैं, जिससे
एक-दूसरे में ममता बनी रहती है, कर्मानुसार सर्व का किया फल देते हैं। तमोगुण
विभाग के श्री शंकर जी मालिक हैं, जिसके कारण सर्व का अन्त होता है और पात
रूप में संसार के प्राणी जानो। यह है संसार रूपी वृक्ष के सर्वार्ंगों की भिन्न-भिन्न
जानकारी। यह ज्ञान स्वयं परमेश्वर कबीर जी ने अपने मुख कमल से बोला था।
वह कबीर वाणी, कबीर बीजक, कबीर शब्दावली तथा कबीर सागर में श्री धनी
धर्मदास (बाँधवगढ़ वाले) द्वारा लिखा गया था। उस परमेश्वर ने तो बताया ही था या वर्तमान में इस जगतगुरु तत्वदर्शी संत रामपाल जी ने समझा है। यह कृपा परमेश्वरकबीर जी की ही है कि सम्पूर्ण आध्यात्म ज्ञान प्राप्त है।
गीता अध्याय 15 श्लोक 1 के अनुसार तत्वदर्शी सन्त की पहचान से भी यह सिद्ध हुआ कि वर्तमान में विश्व में केवल संत रामपाल जी ही एक मात्र तत्वदर्शी सन्त है।
जगतगुरु तत्वदर्शी संत रामपालजी महाराज की शरण में आये और अपने मानव जीवन को सफल बनाये |
"धन्यवाद "
भगवान कोन हैं, कैसा है, किसने देखा है अधिक जानकारी के लिए यहां क्लिक करें |


Kabir is god
ReplyDeleteReally ✅✔️
DeleteThank you
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